चीन के साथ सीमा पर तनाव जारी है, लेकिन इसके बाद भी चीन भारत के आगे बाधाएं खड़ी करने के लिए नई-नई चालें चल रहा है। लेकिन इस बार उसकी चाल उसी पर भारी पड़ गई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के सामने बाधा खड़ी करने के लिए भूटान के साथ अपने क्षेत्रीय विवाद को बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन उनके द्वारा ऐसा करना बीजिंग पर भारी पड़ गया है, क्योंकि अब भूटान भारत के और करीब आ गया है।
पिछली बार भूटान दोकलम विवाद के दौरान इन दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच फंसा था, हालांकि इस बार थिम्पू ने खुद को भारत के निकट रखने का फैसला किया है। इस मामले से संबंधित लोगों ने इसकी जानकारी दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में, भारत और चीन के बीच भौगोलिक रूप से स्थित भूटान ने तय किया था कि उसे अपने दो पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना चाहिए, ताकि थिंपू फिर से इन दो देशों के बीच विवाद में न फंसे। नई दिल्ली और थिंपू में बैठे लोगों ने कहा कि भूटान में पिछले दो-तीन वर्षों में अपने संबंधों को लेकर इस तरह की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
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हालांकि, अमेरिका स्थित बहुराष्ट्रीय फंड, ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी की जून में हुई बैठक के दौरान जब थिंपू ने सकतेंग अभयारण्य के लिए धन की मांग की तो, बीजिंग ने उसे विवादित क्षेत्र बताकर उसके लिए धन आवंटित करने से रोकना चाहा।
चीनी प्रतिनिधि ने आपत्ति जताते हुए दावा किया कि लगभग 650 वर्ग किलोमीटर में फैले अभयारण्य को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद है, इसलिए धन आवंटित नहीं किया जाना चाहिए। इन मुद्दों को लेकर भूटान ने तय किया है कि उसे भारत के साथ संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना चाहिए।
थिंपू ने इस बैठक के बाद औपचारिक रूप से चीन के दावे का विरोध किया और दिल्ली में चीनी मिशन को एक सीमांकन जारी किया। भूटान और चीन संचार करने के लिए दिल्ली में स्थित अपने मिशन का उपयोग करते हैं।