संकेत है कि म्यांमार में चीन की प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर योजना संकट में फंस गई है। चीन के बहुचर्चित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत चीन-म्यांमार इकॉनमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस पर काम की रफ्तार हाल में थमती नजर आ रही है। बताया जाता है कि म्यांमार में बढ़े राजनीतिक और आर्थिक संकट के कारण इस परियोजना की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इस परियोजना के जरिए चीन से म्यांमार के बीच रेल और सड़क नेटवर्क बनाया जा रहा है। इसका एक हिस्सा कुछ महीने पहले चालू हो गया था।इससे पश्चिमी चीन से म्यांमार तक रेल मार्ग से आना-जाना संभव हो गया है। चीन के नजरिए से ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है, क्योंकि इससे हिंद महासागर तक उसकी सीधी पहुंच बनेगी। रेल मार्ग के अलावा इस कॉरिडोर के तहत सड़क मार्ग भी बनाया गया है। जून में ये मार्ग खुल गया, जब चीन के चोंगछिंग से म्यांमार स्थित मंडाले तक इस मार्ग से 60 कंटेनर पहुंचे। इन कंटेनरों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटो पाट-पुर्जे और दूसरे सामान लाए गए।
लेकिन बताया जाता है कि ये सारा निर्माण कार्य लगभग दो साल पहले पूरा हुआ था। फरवरी 2021 में म्यांमार में हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से इस योजना पर काम लगभग ठहरा हुआ है। म्यांमार स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजी एंड पॉलिसी से जुड़े एक रिसर्चर ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि चीन म्यांमार की राजनीतिक घटनाओं को लेकर काफी चिंतित है। खासकर म्यांमार में फैली चीन विरोधी भावनाओं से उसे चिंता हुई है।
कुछ समय पहले इसी थिंक टैंक ने म्यांमार में कॉरिडोर के बारे में एक सर्वे किया। उसमें 83 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से म्यांमार से कहीं ज्यादा फायदा चीन होगा। जबकि 12 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे दोनों देशों को लाभ होगा।
वेबसाइट निक्कईएशिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना बढ़ती वित्तीय चुनौतियों का शिकार हो गई है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण की समस्या भी इसकी राह में रुकावट बनी है। बताया जाता है कि चीन जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहता है। लेकिन म्यांमार की सैनिक सरकार प्रोजेक्ट के लिए नया वित्त जुटाने में कमजोर पड़ रही है।
वैसे म्यांमार पर विदेशी कर्ज का बोझ ज्यादा नहीं है। 2020 में उस पर मौजूद विदेशी कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद के सिर्फ 17 प्रतिशत के बराबर था। लेकिन 2021 में सैनिक तख्ता पलट के बाद म्यांमार पर पश्चिमी देशों ने सख्त प्रतिबंध लगा दिए। इससे पश्चिमी वित्तीय स्रोतों से उसका संबंध टूट गया। इससे म्यांमार की चीन और रूस पर निर्भरता बढ़ गई है।
जानकारों का कहना है कि अगर चीन म्यांमार की आंतरिक स्थिति को लेकर आश्वस्त हुआ, तो वह इस परियोजना में ज्यादा धन लगा सकता है। इसकी वजह उसके लिए इस परियोजना का महत्त्व है। हिंद महासागर तक पहुंच बनना उसकी बीआरआई की एक महत्त्वपूर्ण सफलता होगी। म्यांमार को उम्मीद है कि इस परियोजना के पूरा होने पर वह कारोबार का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन जाएगा। लेकिन समस्या यह है कि म्यांमार में सैनिक शासन के साथ-साथ चीन विरोधी भावनाएं भी फैलती जा रही हैं, जिससे इस प्रोजेक्ट के लिए जोखिम बढ़ गया है।