इस्राइल समर्थित समूह गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन ने गाजा में राहत सामग्री बांटने के लिए अमेरिका से करीब 30 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। यह मदद मांगने वाला आवेदन ट्रंप प्रशासन को दिया गया है। इस जानकारी की पुष्टि तीन अमेरिकी अधिकारियों और संगठन के दस्तावेज़ों से हुई है।
गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन के आवेदन में पहली बार इसके काम और कुछ वित्तीय जानकारी दी गई है। फाउंडेशन का कहना है कि मई के आखिर से उसने दक्षिणी गाजा में लाखों फलस्तीनियों को भोजन उपलब्ध कराया है, क्योंकि इस्राइल की नाकाबंदी और सैन्य अभियान ने गाजा में भुखमरी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। लेकिन इसमें बड़ी परेशानी यह है कि जब लोग राहत सामग्री लेने पहुंचते हैं, तो उन पर लगभग रोज गोलियां चलती हैं और कई लोग मारे जा चुके हैं। कुछ बड़े मानवीय संगठनों ने फाउंडेशन पर यह भी आरोप लगाया है कि वह इस्राइल के साथ मिलकर हमास के खिलाफ काम कर रहा है, जो मानवीय नियमों के खिलाफ है।
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USAID को दिया वित्तपोषण आवेदन
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फाउंडेशन ने वित्तपोषण का आवेदन अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) को प्रस्तुत किया था। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा कि यह एजेंसी अब अमेरिकी विदेश विभाग में मिलाई जा रही है, इसलिए यह उसके आखिरी फैसलों में से एक हो सकता है। दो अधिकारियों ने बताया कि शायद अमेरिका इस फंड को मंजूरी देने जा रहा है, लेकिन उससे पहले जांच और समीक्षा की जरूरत होती है।
फाउंडेशन ने एक पत्र भी भेजा
फाउंडेशन की तरफ से बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को एक पत्र भी भेजा गया, जिसमें गाजा मानवतावादी फाउंडेशन के सचिव लोइक हेंडरसन ने कहा कि वे अमेरिका के साथ साझेदारी करके गाजा में 'जान बचाने वाले अभियान' जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, न तो विदेश विभाग और न ही हेंडरसन ने शनिवार को टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब दिया।
इस्राइल का आरोप- संयुक्त राष्ट्र की मदद हमास के हाथों में चली जाती है
इस्राइल का कहना है कि यह फाउंडेशन एक नई राहत प्रणाली की शुरुआत है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कम होगी। इस्राइल का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र की मदद हमास के हाथ में चली जाती है। इस्राइल की योजना यह है कि गाजा की 20 लाख आबादी को दक्षिण में केंद्रित किया जाए, ताकि बाकी हिस्सों में वह हमास के खिलाफ आसानी से लड़ सके। सहायता कार्यकर्ता डर रहे हैं कि यह योजना धीरे-धीरे गाजा से फलस्तीनियों को हटाने की कोशिश है, जिसे जबरन विस्थापन माना जा सकता है।
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फाउंडेशन के पास अनुभव और पारदर्शिता की कमी: संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र और कई बड़े एनजीओ का कहना है कि इस फाउंडेशन के पास न अनुभव है, न पारदर्शिता, और न ही युद्ध जैसी स्थिति में तटस्थता (निष्पक्षता) बनाए रखने की समझ। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जब से यह संगठन काम कर रहा है, राहत सामग्री पाने की कोशिश करते समय कई सौ लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस्राइली सैनिक भारी गोलीबारी करते हैं ताकि भीड़ को रोका जा सके। हालांकि, इस्राइली सेना का कहना है कि वे सीधे नागरिकों पर गोली नहीं चलाते, बल्कि चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई जाती हैं या उन लोगों पर जो संदेहास्पद लगते हैं और सैनिकों के बहुत पास आ जाते हैं।
फाउंडेशन को अभी तक किसने पैसे दिए, यह स्पष्ट नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस फाउंडेशन को अभी तक किसने पैसे दिए हैं। अमेरिका ने पहले कहा था कि वह इसे कोई पैसा नहीं दे रहा है। फाउंडेशन ने कहा कि मई में उसे 'कुछ सरकारी स्रोतों' से करीब 119 मिलियन डॉलर मिले, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि वो सरकारें कौन-सी थीं। जून के लिए उन्हें उन्हीं स्रोतों से 38 मिलियन डॉलर की उम्मीद है, और अमेरिका से 30 मिलियन डॉलर की उम्मीद है। आवेदन में निजी परोपकार या किसी अन्य स्रोत से कोई फंडिंग नहीं दिखाई गई है।
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