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डेल्टा वैरिएंट के फैलते संक्रमण से सवालों के कठघरे में खड़े हुए बोरिस जॉनसन

Thu, 17 Jun 2021 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

बोरिस जॉनसन सरकार पर शुरुआत से ही कोरोना महामारी को संभालने में अस्थिर रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैँ। शुरुआत में जॉनसन ने इस वायरस को गंभीरता से नहीं लिया था। आरोप है कि जब वे खुद इससे संक्रमित हुए, तब जाकर उन्होंने संक्रमण रोकने के उपायों को तरजीह दी...
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से ब्रिटेन में चिंताएं लगातार गहरा बढ़ रही हैं। इसके कारण बढ़ रहे संक्रमणों की वजह से बोरिस जॉनसन सरकार ने देश में लॉकडाउन संबंधी तमाम पाबंदियां हटाने का इरादा चार हफ्तों के लिए टाल दिया है। लेकिन अब देश के अंदर प्रधानमंत्री जॉनसन की यह कह कर आलोचना हो रही है कि डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण को रोकने के लिए उनकी सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए।

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बुधवार को ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में विपक्ष के नेता कियर स्टार्मर ने आरोप लगाया कि जॉनसन ने भारत को रेड लिस्ट में डालने में देर की, जहां सबसे पहले ये वैरिएंट पाया गया था। रेड लिस्ट में डाले गए देशों के मामले में सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू हो जाते हैं। गौरतलब है कि जॉनसन ने इस हफ्ते कहा था कि डेल्टा वैरिएंट उससे कहीं ज्यादा तेज गति से फैल रहा है, जिसकी पहले भविष्यवाणी की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक प्रतिबंध हटाए गए, तो इस वैरिएंट के संक्रमण के कारण हजारों और मौतें हो सकती हैं।

विपक्षी नेता ने कहा कि यात्रा प्रतिबंध लागू होने में हुई देरी के कारण इस वैरिएंट को फैलने का मौका मिला। स्टार्मर ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही जॉनसन को ये सुझाव दिया था कि वे सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू करें। लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। कुछ मीडिया चर्चाओं में आरोप लगाया गया है कि उस समय जॉनसन भारत यात्रा पर जाने वाले थे। इस कारण उन्होंने भारत को रेड लिस्ट में देर से डाला। ये फैसला तब किया गया, जब भारत में महामारी की दूसरी लहर के कारण उनकी यात्रा रद्द हो गई।  
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ब्रिटेन में इस वक्त कोरोना संक्रमण के जितने मामले सामने आ रहे हैं, उनमें 90 फीसदी का कारण डेल्टा वैरिएंट है। कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि ब्रिटेन ने कोरोना संक्रमण पर काबू पा लिया है। ब्रिटेन उन देशों में है, जहां सबसे ज्यादा टीकाकरण हुआ है। लेकिन डेल्टा वैरिएंट की वजह से अब ब्रिटेन में महामारी की नई लहर का खतरा पैदा हो गया है।

बोरिस जॉनसन सरकार पर शुरुआत से ही कोरोना महामारी को संभालने में अस्थिर रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैँ। शुरुआत में जॉनसन ने इस वायरस को गंभीरता से नहीं लिया था। आरोप है कि जब वे खुद इससे संक्रमित हुए, तब जाकर उन्होंने संक्रमण रोकने के उपायों को तरजीह दी। उनके पूर्व सलाहकार डोमनिक कॉमिन्स ने कुछ दिन पहले एक संसदीय समिति को बताया था कि पिछले सितंबर में भी महामारी की दूसरी लहर से पहले जॉनसन ने लॉकडाउन लागू करने में लेट-लतीफी की, जिसका बहुत गंभीर नतीजा ब्रिटेन को चुकाना पड़ा। अब डेल्टा वैरिएंट के फैलाव से जॉनसन फिर निशाने पर आ गए हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री का कहना है कि जैसे ही डेल्टा वैरिएंट को चिंता की वजह के रूप में चिन्हित किया गया, उन्होंने भारत को रेड लिस्ट में डाल दिया। अब उन्होंने लॉकडाउन के प्रतिबंधों को 21 जून के बाद चार हफ्तों तक और लागू रखने का फैसल किया है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ब्रिटेन सरकार ने जहां पाकिस्तान और बांग्लादेश को अप्रैल के आरंभ में ही रेड लिस्ट में डाला, वहीं 23 अप्रैल को जाकर उसने भारत को इस सूची में रखने का फैसला किया। जबकि अप्रैल के आरंभ से ही भारत में रोज एक लाख से ज्यादा संक्रमण के मामले सामने आ रहे थे। भारत को रेड लिस्ट में डालने में देर की क्या वजह रही, इसे सरकार ने साफ नहीं किया है। उसने इसके लिए डेल्टा वैरिएंट की ब्रिटेन में पहचान की तारीख की आड़ ली है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में सबसे पहले इस वैरिएंट की पहचान 28 अप्रैल को हुई थी।

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