कोरोना महामारी के बीच वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक ईजाद की है, जो बच्चों में श्वसन संक्रमण रोकने में बड़ी मददगार होगी। इस तकनीक में श्वसन रोग फैलाने वाले मानव पैरेंफ्लुएंजा वायरस को रोकने की प्रक्रिया में सुधार किया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों में प्रोटीन या पेप्टाइड की छोटी-सी मात्रा को जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा स्वस्थ रखने में मदद करना। यह तकनीक कोशिकाओं में मानव पैरेंफ्लुएंजा वायरस को चिपकने से रोकेगी। नई तकनीक को लेकर शोधकर्ताओं ने अमेरिकन केमिकल सोसायटी की पत्रिका में अपने शोध के निष्कर्ष प्रकाशित किए हैं।
मानव पैरेंफ्लुएंजा वायरस या एचपीआईवी, बच्चों में श्वसन संक्रमण की प्रमुख वजह है। इसी कारण निमोनिया व अन्य श्वसन रोग होते हैं। यह वायरस बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों को भी जकड़ लेता है।
इस तरह काम करेगी यह तकनीक
बच्चों व बूढ़ों को अपना शिकार बनाने के लिए एचपीआईवी वायरस उनके शरीर की कोशिकाओं पर चिपक जाती है और नए वायरस बनाना शुरू कर देता है। उसे ऐसा करने से रोकने के लिए पेप्टाइट ट्रीटमेंट किया जाता है। एचपीआईवी3 सबसे सक्रिय वायरस है। अभी इस वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए कोई टीके या एंटीवायरल दवाएं नहीं हैं।
विस्कॉसिंस मैडिसन विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान विभाग में सैम गेलमैन लैब के नेतृत्व में और कोलंबिया विश्वविद्यालय में ऐनी मोस्कोना और माटेओ पोरोटो की लैब में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पेप्टाइड तकनीक से इस वायरस के उपचार पर काम की प्रक्रिया में बदलाव किया। यह तकनीक एचपीआईवी 3 वायरस को को रोकने में सक्षम है।
बता दें, वर्तमान में पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है। कोरोना वायरस भी श्वसन तंत्र पर ही हमला करता है। कोरोना के आरंभिक लक्षण निमोनिया से मिलते-जुलते होते हैं, क्योंकि सर्दी-खांसी-बुखार से इसकी शुरुआत होती है। हालांकि कई मरीजों में इसके बहुत कम लक्षण नजर आ रहे हैं।