अमेरिका में राष्ट्रपति पद की पहली हिंदू उम्मीदवार तुलसी गेबार्ड ने गुरुवार को अपने अतीत में किए काम पर मिल रही आलोचनाओं का जवाब दिया। उन्होंने समलैंगिक अधिकारों के खिलाफ दिए गए अपने पुराने बयानों के लिए एक वीडियो जारी कर माफी मांगी है।
गेबार्ड का ये चार मिनट का वीडियो वाशिंगटन डीसी में शूट किया गया है। वह बर्फ के बीच खड़े होकर बोल रही हैं कि उनके विचार तभी से काफी बदल गए हैं, जब से उनके बयानों से एलजीबीटीक्यू समुदाय को ठेस पहुंची।
हवाई से डेमोक्रेटिक कांग्रेसविमेन ने अपने पुराने बयानों के लिए माफी मांगी। लेकिन वह एक बार फिर आलोचनाओं में तब आईं जब उन्होंने सीएनएन को बीते हफ्ते दिए इंटरव्यू में कहा कि वह राष्ट्रपति पद के लिए लड़ेंगी।
स्टेट रिप्रेजेंटेटिव रहते हुए 37 वर्षीय गेबार्ड ने समलैंगिक विवाह के खिलाफ कैंपेन चलाया था। उन्होंने ये कैंपेन ग्रुप अलाइंस फॉर ट्रेडिश्नल मैरिज एंड वैल्यूज संगठन के साथ चलाया था। उस वक्त गेबार्ड की उम्र 20 साल के करीब थी। गेबार्ड के पिता ने इस संगठन की स्थापना की थी। जो इस वक्त होनोलूलू शहर के काउंसिलमैन और स्टेट सीनेटर हैं। समलैंगिक विवाह के खिलाफ पैरवी करने के लिए उन्होंने इस संगठन की स्थापना की थी।
गेबार्ड ने वीडियो में बताया कि वह सामाजिक रूप से एक रूढ़िवादी परिवार में पली बढ़ी हैं और ये विश्वास करती आई हैं कि शादी एक पुरुष और एक महिला के बीच ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह जीवन के अनुभवों के आधार पर अपने विचार तय करती हैं।
गेबार्ड ने कहा, "जब हम एलजीबीटीक्यू लोगों के मूल अधिकारों को अस्वीकार करते हैं जो हर अमेरिकी के लिए हैं, तो हम उनकी मानवता को नकार रहे होते हैं, इस बात को नकार रहे होते हैं कि वह समान हैं। हम एक ऐसा वातावरण भी उत्पन्न कर देते हैं जो भेदभाव और हिंसा को जन्म देता है।" उन्होंने माना कि आज भी एलजीबीटीक्यू लोग भेदभाव का सामना करते हैं और डरते हैं कि उनके अधिकारों को "वो लोग छीन लेंगे जो वही विचार रखते हैं जैसे मैं रखती थी।"
गेबार्ड ने कहा कि ईराक और कुवैत में हवाई नेशनल गार्ड के साथ काम करते वक्त उनके समलैंगिक विवाह को लेकर विचारों में परिवर्तन आया। खाड़ी देशों में काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि पुरानी पोजिशन की जड़ गलत विचारों में होती है, "ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वह व्यक्तिगत नैतिकता को परिभाषित और लागू करे।"