श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को संसद में घोषणा की कि वह द्वीप देश के सबसे भीषण आर्थिक संकट पर चर्चा के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं। जापान, सिंगापुर और फिलीपींस की अपनी हाल की यात्राओं के बारे में सदन को जानकारी देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हम भारत के साथ अपनी बातचीत जारी रखे हुए हैं। जापान में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी संक्षिप्त मुलाकात के दौरान मैंने उन्हें अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए नई दिल्ली जाने की अपनी इच्छा से अवगत कराया।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने 1948 के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के कोलंबो से भाग जाने के बाद कार्यभार संभाला था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने हमेशा हमें अपना समर्थन दिया है। मैंने हमेशा हमारे संकट में भारत की सहायता की सराहना की है। मुझे उम्मीद है कि हमारे पुनर्निर्माण के प्रयास में भारत का समर्थन जारी रहेगा।
इस साल जनवरी से भारत ने श्रीलंका को लगभग 4 बिलियन अमरीकी डॉलर की सहायता दी है। इसी साल अप्रैल में श्रीलंका ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था और कर्ज चुकाने में असमर्थता व्यक्त की थी। भारत 12 प्रतिशत के साथ श्रीलंका के द्विपक्षीय लेनदारों की सूची में चीन (52%) और जापान (19%) के बाद तीसरे स्थान पर है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि श्रीलंका को जापान, चीन और भारत सहित लेनदार देशों के साथ एक आम समझौते पर पहुंचने की उम्मीद है। जापान सुलह प्रक्रिया में दिवालिया राष्ट्र की सहायता करने के लिए तैयार है। विक्रमसिंघे ने कहा कि लेनदार देशों और निजी ऋणदाताओं के साथ एक समझौते पर पहुंचने के बाद ही द्वीप राष्ट्र आईएमएफ आश्वासन प्राप्त करने में सक्षम होगा। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि एशियाई विकास बैंक श्रीलंका को 500 मिलियन अमरीकी डालर का ऋण देने पर सहमत हो गया है।