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वेनेजुएला में राष्ट्रपति मादुरो का गठबंधन जीता, अमेरिका-यूरोप ने नतीजा ठुकराया

Tue, 08 Dec 2020 02:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराकस

सार

पिछली नेशनल असेंबली में अमेरिका समर्थित जुआन गुआइदो की पार्टी को बहुमत था। इस बार गुआइदो ने चुनाव का बहिष्कार किया। उन्होंने दावा किया है कि अब भी वे ही बहुमत वाली पार्टी के नेता हैं। अमेरिका और उसके साथी देश गुआइदो का ही समर्थन कर रहे हैं...
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Venezuela President Nicolas Maduro - फोटो : Agency
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विस्तार
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वेनेजुएला के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व वाले सोशलिस्ट गठबंधन को भारी जीत मिली है। इस गठबंधन को 67 फीसदी से अधिक वोट मिले। हालांकि इस बार चुनाव में मतदान बहुत कम हुआ। सिर्फ 31 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस बड़ी जीत के साथ वेनेजुएला में पिछले पांच साल से जारी राजनीतिक अस्थिरता के खत्म हो जाने की उम्मीद है। 2015 के चुनाव में संसद में दक्षिणपंथी गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया था। उस कारण पिछले पांच साल तक राष्ट्रपति और संसद के बीच गतिरोध चलता रहा।

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लेकिन वेनेजुएला के चुनाव नतीजों पर अमेरिका और यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही है। उन्होंने इस चुनाव परिणाम को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इन चुनावों को कलंक बताया और कहा कि इनके जरिए वेनेजुएला की जनता की इच्छा का इजहार नहीं हुआ है। लेकिन इस पर वेनेजुएला के मीडिया ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पोम्पियो ने खुद अपने देश के चुनाव नतीजे को अभी स्वीकार नहीं किया है। वे पराजित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिलने की वकालत कर रहे हैं, लेकिन वेनेजुएला को उपदेश देने से नहीं चूक रहे हैं।


हालांकि वेनेजुएला के चुनावों की निगरानी के पहुंचे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष बताया है, लेकिन अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों ने इसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। पर्येवक्षकों का एक दल अमेरिका से भी आया था, जिसने चुनाव को वैध बताया है। इसके बावजूद हुई आलोचना पर वेनेजुएला के विदेश मंत्री जॉर्ग अरेजा ने इसे वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने एक ट्विटर संदेश में कहा- यूरोप के कुछ दक्षिणपंथी राजनेता वेनेजुएला के खिलाफ आक्रामक बयान दे रहे हैं। खासकर जर्मनी से ऐसा बयान आया है। रविवार को ही रोमानिया में संसदीय चुनाव हुए। वहां भी मतदान प्रतिशत लगभग उतना ही रहा जितना वेनेजुएला में। लेकिन उस पर कोई प्रतिबंध लगाने या उसके बहिष्कार की कहीं बात नहीं हो रही है।   
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वेनेजुएला की नई संसद के लिए हुए चुनाव में 14,400 से अधिक प्रत्याशी शामिल थे।चुनाव की निगरानी के लिए आए न्यूयॉर्क पब्लिक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डैनी शॉ ने रशिया टुडे वेबसाइट से कहा- यहां आना एक दिलचस्प अनुभव रहा है। मैं जहां था, वहां मैंने चुनाव में व्यापक भागीदारी देखी।

चुनाव अधिकारियों ने अच्छी तैयारी की थी और मतदान में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ। शॉ ने यह भी कहा- हमारे देश (अमेरिका) में आप वेनेजुएला के बारे में जो कुछ सुनते हैं, वह झूठ है। वेनेजुएला के लोग लोकतंत्र के मामले में अमेरिका को पाठ पढ़ा सकते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार रह चुकीं ग्लोरिया ला रिवा ने भी कहा कि इन चुनावों की वैधता पर शक करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

पिछली नेशनल असेंबली में अमेरिका समर्थित जुआन गुआइदो की पार्टी को बहुमत था। इस बार गुआइदो ने चुनाव का बहिष्कार किया। उन्होंने दावा किया है कि अब भी वे ही बहुमत वाली पार्टी के नेता हैं। अमेरिका और उसके साथी देश गुआइदो का ही समर्थन कर रहे हैं। लेकिन इस बार वेनेजुएला ने चुनाव की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक बुलाए थे। उसने यूरोपियन यूनियन को भी इसके लिए आमंत्रित किया था। लेकिन ईयू ने यह कह कर आमंत्रण ठुकरा दिया कि कोरोना महामारी के बीच चुनाव के लिए सही माहौल नहीं है। मगर 34 देशों के करीब 300 प्रतिनिधि बतौर पर्यवेक्षक आए। कुल मिलाकर 1,500 पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निगरानी की। इसलिए इस बार चुनावों की आलोचना को ज्यादा वजन नहीं मिल पाया है।

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