अमेरिका के पांच डेमोक्रेट सीनेटरों ने राष्ट्रपति जो बाइडन से उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ गैर-आव्रजक वीजा पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की है। इनमें एच-1बी वीजा भी शामिल है, जो भारतीय आईटी पेशेवरों में काफी लोकप्रिय है।
अमेरिकी सीनेटरों ने कहा है कि इस प्रतिबंध के चलते अमेरिकी नियोक्ताओं, उनके विदेश में जन्मे पेशेवर कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए काफी अनिश्चित हालात पैदा हो गए हैं।
जून, 2020 में ट्रंप ने घोषणा-10052 के जरिए एच-1बी, एल-1, एच-2बी और जे-1 वीजा की प्रक्रिया रोक दी थी। श्रम बाजार में इन वीजा के कथित जोखिमों के मद्देनजर ट्रंप ने यह कदम उठाया था।
हालांकि, ये प्रावधान 31 मार्च, 2021 को खत्म हो रहे हैं, लेकिन कंपनियों का कहना है कि यदि इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो उनका कारोबार और अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार प्रभावित हो सकता है।
इन सीनेटरों ने कहा है कि रिपोर्ट से पता चलता है कि सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एच-1बी वीजा धारकों के पद अभी खाली हैं या इन्हें विदेशी बाजारों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
ड्रीमर्स को नागरिकता पर अमेरिका में बिल पारित
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने दो प्रमुख विधेयक पारित करते हुए लाखों अविभाजित अप्रवासियों को राहत देंगे और कुछ प्रवासी कामगारों व उनके बच्चों की नागरिकता की राह खोलेंगे। इनमें ड्रीमर्स भी शामिल हैं जो बचपन में बिना दस्तावेज अवैध रूप से अमेरिका आकर बस गए और अब युवा होकर यहां रोजगार पाना चाहते हैं।
इस विधेयक में उन बच्चों की नागरिकता का रास्ता भी खुलेगा जिनके माता-पिता देश में कानूनी तौर पर एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत रह रहे हैं। सदन ने इस विधेयक को 197 के मुकाबले 228 वोटों से पारित कर दिया। राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसका स्वागत करते हुए इसे देश की आव्रजन प्रणाली में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहला कदम बताया। उन्होंने कहा, मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूं।