अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की अलोकप्रियता का हाल यह है कि मिड टर्म चुनाव के प्रचार के अभियान से उन्हें खुद को लगभग हटा लेना पड़ा है। पिछले कुछ दिन से उन्होंने किसी बड़ी चुनाव सभा को संबोधित नहीं किया है। इसके बजाय से लोगों के छोटे समूहों से संवाद करने की रणनीति पर चल रहे हैं, जहां उन्हें अपने प्रशासन के कामकाज के बारे में स्पष्टीकरण देने का बेहतर मौका मिलता है।
मिड टर्म चुनाव के लिए मतदान अगले आठ नवंबर को होगा। अमेरिका में राष्ट्रपति के कार्यकाल की मध्य अवधि में होने वाले संसदीय और अन्य चुनावों को मिडटर्म्स कहा जाता है। अन्य चुनावों में राज्यों के कई गवर्नरों, राज्यों की विधायिकाओं और स्थानीय प्रशासन के निकायों का निर्वाचन शामिल हैं। संसदीय चुनाव के तहत कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सभी सदस्य चुने जाते हैं, जबकि सीनेट के एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है।
अभी मिल रहे तमाम संकेत डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ हैं। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों से आम संकेत मिला है कि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में सत्ताधारी डेमोक्रेटिव पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। सीनेट का बहुमत भी वह गवां सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो राष्ट्रपति बाइडन की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपने एक आकलन में कहा है कि अगर दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत हो गया, तो वह बाइडन के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू करवा सकती है। साथ ही वह प्रशासन के बजट प्रस्तावों को लटका सकती है। इसकी बीच बाइडन के लिए शासन करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
विश्लेषकों के मुताबिक, मिडटर्म्स के नतीजों से ही यह भी तय होगा कि बाइडन 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में दूसरा कार्यकाल पाने के लिए मैदान में उतरेंगे या नहीं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी अपने को हार से बचा पाई, तो उससे बाइडन का फिर चुनाव लड़ने के लिए मनोबल बढ़ेगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के रणनीतिकार जिम मैनले ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘अगर चुनाव नतीजे अभी लगाए जा रहे अनुमान जितने ही बुरे रहे, तो पार्टी में अफरातफरी मच जाएगी। तब पार्टी नेतृत्व में पूरे बदलाव की मांग कई हलकों से उठेगी।’
अस्सी वर्षीय बाइडन ने 2024 के बारे में अभी तक अपना इरादा स्पष्ट नहीं किया है। कुछ रोज पहले उन्होंने कहा था कि मिडटर्म्स के बाद वे इस बारे में फैसला करने की प्रक्रिया में पहुंचेंगे। लेकिन उन्होंने कहा कि वे अपना काम अच्छी तरह कर रहे हैं। अगले कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा- ‘मुझे यकीन है कि मैं अपना काम ठीक से कर पाऊंगा।’
बाइडन की मुश्किल महंगाई पर काबू ना पा सकने की वजह से बढ़ी है। कुछ टीकाकारों ने कहा है कि महंगाई ऐसी एसिड है, जो बाइडन की संभावनाओं को क्षतिग्रस्त कर रही है। महंगाई से परेशान लोग बाइडन की दूसरी उपलब्धियों के बारे में चर्चा करने के लिए तैयार नहीं दिखते। डेमोक्रेटिक पार्टी के रणनीतिकार एड्राइन एलरॉड ने कहा- ‘बाइडन अब सिर्फ उन्हीं जगहों पर प्रचार करने जा रहे हैं, जहां इससे पार्टी को मदद मिल सकती है। जो उम्मीदवार अपने प्रचार को स्थानीय मुद्दों पर चला रहे हैं, वे राष्ट्रीय नेताओं को बुलाने से बच रहे हैँ।’