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इन पड़ोसी देशों में साल भर मचा रहा राजनीतिक घमासान, देखें साल 2018 में कहां क्या हुई घटना

Sat, 22 Dec 2018 05:56 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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नवाज शरीफ, इमरान खान - फोटो : Social Media
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साल 2018 में भारत की राजनीति के साथ ही पड़ोसी मुल्कों की सियासत में भी काफी उतार-चढ़ावा रहा। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, पूरब में बांग्लादेश, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण पश्चिम में हिंद महासागर में स्थित मालदीव में यह साल राजनीतिक घटनाक्रमों से भरा रहा। आइए डालते हैं चारों पड़ोसियों पर एक नजर।

पाकिस्तान को मिला नया पीएम तो पूर्व पीएम को हुई जेल

पाकिस्तान में रिकॉर्ड तीन बार प्रधानमंत्री का पद संभालाने वाले नवाज शरीफ को जेल जाना पड़ा और 22 सालों से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए शेरवानी सिलवाए बैठे इमरान खान के सिर सत्ता का ताज सजा। भ्रष्टाचार से बीमार हो चुके पाकिस्तान को इस्लामी कल्याणकारी राज्य में बदलने का वादा करने वाले इमरान खान को जनता ने अपना समर्थन दिया। पाकिस्तान में 25 जुलाई को हुए आम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (पीटीआई) के उभरने के बाद इमरान खान ने पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 

पूर्व पीएम नवाज को 10 साल की जेल

हालांकि नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण पिछले साल ही प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। नवाज शरीफ के खिलाफ 2016 के पनामा पेपर्स लीक मामले में तीन मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से एक मामले में अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई। सियासत में दागी होना नई बात नहीं है लेकिन नवाज के फिर से सत्ता पर काबिज होने के सपनों पर अदालत ने पानी फेर दिया और उन्हें चुनाव लड़ने से भी अयोग्य करार दिया था। हालांकि नवाज शरीफ अपने खिलाफ सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करते रहे हैं। नवाज का आरोप है कि सेना और अदालतों ने उन्हें सत्ता से बाहर रखने के लिए मिल कर साजिश रची। 
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वहीं क्रिकेट से सियासत में आए इमरान खान की जीत भारत के लिए भी कई चिंताएं लेकर आई हैं। इमरान पर पाकिस्तान की उदारवादी और विपक्षी पार्टियां 'तालिबान खान' होने का आरोप लगाते हैं। इमरान ने पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकवादियों के खिलाफ सेना के अभियानों का विरोध किया।

हालांकि जानकार बताते हैं कि आतंकवादियों के बारे में कहा जाता है कि पाकिस्तान की सेना की मदद के बिना वह टिक नहीं सकते। यानि ऐसे आतंकवादियों के साथ खड़े होकर इमरान खान ने कहीं ना कहीं सेना की ही मदद की। इसलिए राजनीतिक पंडितों का कहना है कि पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री बने, सेना ही वहां की सरकार की नीतियों को लागू करने में अहम भूमिका निभाती है। 
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बांग्लादेश में भी पूर्व प्रधानमंत्री को हुई 10 साल की जेल

khalida Jia

पूर्व प्रधानमंत्री जिया को 10 साल की जेल

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की धुर विरोधी पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के एक मामले में 29 अक्टूबर 2018 को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई है। लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं। इसके एक दिन बाद यानि 30 अक्टूबर 2018 को हाईकोर्ट ने खालिदा जिया को जिया अनाथालय ट्रस्ट के फंड में धांधली के मामले में फरवरी में मिली पांच साल कैद की सजा को दोगुनी करते हुए 10 साल कर दी। 73 वर्षीय जिया इस साल फरवरी से जेल की सजा काट रही हैं। उन पर चैरिटी फंड के करीब 3 लाख 75 हजार अमेरिकी डॉलर के गलत इस्तेमाल के आरोप थे। 

जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 2014 के चुनाव का बहिष्कार किया था। जिसके बाद शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश आवामी लीग विजयी हुई मिली थी। खालिदा जिया अपने पति और पूर्व सैन्य तानाशाह की हत्या के बाद 1980 के मध्य में राजनीति में उतरी थीं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और हिंसा से जुड़े करीब आधा दर्ज मामले दर्ज हैं। हालांकि जिया इन आरोपों को नकारती रही हैं और उनका कहना है कि यह उनके परिवार को राजनीति से दूर करने का षड्यंत्र है। 

श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपति को बनाया पीएम फिर हटाना पड़ा

मैत्रीपाल सिरिसेना और रानिल विक्रमसिंघे

श्रीलंका में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था

पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में तो सियासी उठापटक का ऐसा दौर चला जिससे राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। श्रीलंका में जारी इस राजनीतिक उठापटक में 16 दिसंबर को रानिल विक्रमसिंघे ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद पर वापसी की। राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को फिर से प्रधानमंत्री न बनाने की कसम खाई थी। लेकिन उन्हें हटाने और फिर से पद पर लौटने का घटनाक्रम बहुत नाटकीय रहा। 

26 अक्टूबर को श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को हटाकर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री बना दिया। राष्ट्रपति सचिवालय में मैत्रीपाला सिरीसेना ने महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। हालांकि इस बीच रानिल विक्रमसिंघे कहते रहे कि वे श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हैं। 

सिरिसेना ने अपने धुर विरोधी रहे राजपक्षे को अपनी सरकार में अहम पद देकर सबको चौंका दिया। महिंदा राजपक्षे वही हैं जिन्हें मौजूदा राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने पिछले राष्ट्रपति चुनावों में हराया था। जिसके बाद महिंदा राजपक्षे को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था। साल 2015 के चुनाव में मैत्रीपाला सिरीसेना ने तमाम दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। 

राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेना ने मतभेदों की वजह से अपने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में पद से हटा दिया था। इसके बाद महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई लेकिन राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके। संसद और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच जारी गतिरोध के कारण श्रीलंका में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।

इस बीच एक निचली अदालत ने राजपक्षे और उनकी मंत्रिपरिषद के काम करने पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। संसद ने राष्ट्रपति और उनके मंत्रियों के बजट में भी कटौती कर दी थी। जिसके बाद राष्ट्रपति सिरिसेना के लिए सरकार चलाने और संसद से बजट पारित कराना जरूरी हो गया था। 
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मालदीव मे घमासान के बाद जीता लोकतंत्र

अब्दुल्ला यामीन- मोहम्मद सोलिह
मालदीव में भी लोकतंत्र की परीक्षा हुई। 23 सिंतबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में मालदीव की जनता ने विपक्ष के साझे उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के पक्ष में जनादेश दिया। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हार का मुंह देखना पड़ा। यामीन के विरोध में देश का पूरा विपक्ष एक हो गया था। हालांकि कई लोगों को आशंका थी कि यामीन ने जिस तरह से देश के सुप्रीम कोर्ट, निर्वाचन आयोग और मीडिया पर अपना नियंत्रण कायम किया है उससे चुनावी नतीजे भी प्रभावित होंगे। 

साल 2008 में चुने गए देश के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति नशीद के 2013 में हुए तख्तापलट के बाद अब्दुल यामीन देश के राष्ट्रपति बन गए। राष्ट्रपति रहने के दौरान यामीन ने चुन-चुनकर अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया। सत्ता में आने के बाद से यामीन ने कई ऐसे कानून बनाए जिनसे विपक्षी नेता या तो जेल में डाल दिए गए या उन्हें देश छोड़ना पड़ा। इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों को गिरफ्तार कर लिया गया था। 

पहले निर्वाचित राष्ट्रपति नशीद लौटे देश

सोलिह चार पार्टियों के गठबंधन के नेता हैं। इन पार्टियों के अधिकतर नेता या तो जेल में बंद हैं या निर्वासित जीवन जी रहे हैं। देश के उच्चतम न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट वापस लिए जाने के दो दिन बाद मोहम्मद नशीद एक नवंबर को वापस देश लौट आए। नशीद बीते दो सालों से ब्रिटेन और फिर श्रीलंका में राजनीतिक शरण लिए हुए थे। अदालत ने कहा था कि नशीद को तब तक हिरासत में नहीं लिया जा सकता जब तक आतंकवाद मामले में जेल की सजा के विरुद्ध उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती। 

भारत समर्थक हैं नए राष्ट्रपति सोलिह

माना जाता है कि श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते चीन ने जो किया, वही काम चीन ने यामीन के राष्ट्रपति काल में मालदीव में किया। मालदीव को सबसे ज्यादा विदेशी निवेश चीन से मिल रहा है। हालांकि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर रहे हैं। सोलिह भारत के साथ बेहतर राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बनाना चाहते हैं। यहीं वजह है कि 17 नवंबर को हुए इब्राहिम सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की थी। 
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