नेपाल में मधेस आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के सात साल गुजर चुके हैं, लेकिन उससे पीड़ित लोग आज भी दर्दनाक जिंदगी जी रहे हैँ। लगभग सभी दलों के नेताओं ने उनके पुनर्वास और उन्हें मुआवजा देने के वादे किए, लेकिन उन पर किसी ने अमल नही किया। अब जबकि देश में आम चुनाव का माहौल है, तो इस मसले ने फिर सबका ध्यान खींचा है।
नेपाल में मधेस उन लोगों को कहा जाता है, जिनके पूर्वज भारत- खास कर बिहार से आकर यहां बसे थे। उन लोगों की बहुसंख्या वाले इलाकों को मिला कर मधेश प्रांत का गठन किया गया है। 2015 में नए संविधान को लागू करने के समय मधेश समुदाय के लोग आंदोलन पर उतर आए थे। उस दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई में कई लोगों की जान गई, अनेक लोग घायल हुए और संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ। मधेश आंदोलन का नेतृत्व तब सद्भावना पार्टी ने किया था। उसका आरोप था कि नए संविधान में मधेस आबादी के हितों की अनदेखी की गई है।
अखबार काठमांडू पोस्ट ने मधेस आंदोलन के दौरान जख्मी हुए कई लोगों से बातचीत के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। उसके मुताबिक आंदोलन के दौरान हिंसा पीड़ित हुए लोगों का अब मधेश पार्टियों से भरोसा डिग चुका है। उन्हें शिकायत है कि हर पार्टी ने उन्हें राम भरोसे छोड़ दिया। ऐसे ही एक व्यक्ति राजदेवी नगरपालिका निवासी रणवीर सिंह राजपूत हैं। आंदोलन के दौरान उन्हें पुलिस की गोली लगी थी। इससे उनकी आंख की रोशनी चली गई। तब से वे कामकाज करने में अक्षम हैँ।
सिंह ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘आंदोलन के दौरान मेरे घायल होने के बाद कोई मधेस पार्टी मेरी सहायता करने नहीं आई। जबकि आज मैं अपने परिवार का भरण-पोषण करने की स्थिति में भी नहीं हूं।’ सिंह ने बताया कि उन्होंने हर स्थानीय और प्रांतीय नेता से संपर्क किया। मधेश राज्य के एक मंत्री से भी मुलाकात की। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। सिंह ने कहा- मधेशी पार्टियां किसी के लिए कुछ नहीं करतीं। वे सिर्फ संघीय सरकार में हिस्सा पाने की सौदेबाजी करने में लगी रही हैं।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक आंदोलन के बाद सद्भावना पार्टी ने कहा था कि वह हर जख्मी का पुनर्वास कराएगी। साथ ही सबको 50 लाख रुपये मुआवाजा सरकार से दिलवाया जाएगा। 2017 के आम चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में दो अन्य पार्टियों राष्ट्रीय जनता पार्टी और संघीय समाजवादी फोरम ने भी ऐसे ही वादे किए। लेकिन इनमें से कोई भी पार्टी उन वादों को पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं दिखी है।
राष्ट्रीय जनता पार्टी और संघीय समाजवादी फोरम ने 2017 में 17 संसदीय सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि मधेश प्रांत में नेपाली कांग्रेस, माओइस्ट सेंटर और यूएमल मिल कर 13 सीटें जीत पाई थीँ। प्रांतीय विधायिका में भी इन दोनों दलों को बहुमत मिला और उनकी सरकार बनी। लेकिन बीते पांच वर्षों में मधेस इलाके के राजनेता आपसी टकराव, पार्टियों में विभाजन और नई पार्टी के गठन में जुटे रहे। इस बीच वे उऩ लोगों को भूल गए, जिनकी वजह से उन्हें सियासी ताकत मिली।
अब हो रहे आम चुनाव में मधेश इलाके की नुमाइंदगी करने की होड़ में जनता समाजवादी पार्टी और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी मैदान में हैं। लेकिन इनमें भी कुल मिला कर वे नेता ही हैं, जिन्होंने पहले मधेसवासियों को निराश किया है।