पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने उनकी सरकार को अस्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का जो आरोप लगाया है, उसे पाकिस्तान के सियासी हलकों में गंभीरता से नहीं लिया गया है। बल्कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में खुद सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऐसी कोई चिट्ठी मौजूद नहीं है, जिसे अंतरराष्ट्रीय साजिश का सबूत समझा जाए। जबकि की सत्ताधारी पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का दावा है कि प्रधानमंत्री ने यह आरोप अमेरिका से भेजे गए एक ‘कूटनीतिक संदेश’ (डिप्लोमैटिक केबल) के आधार पर लगाया है।
इमरान खान सरकार अभी भी अपने इस आरोप पर कायम है। मंगलवार को योजना और विकास मंत्री असद उमर ने कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिका स्थित पाकिस्तानी राजदूत की तरफ से भेजी गई चिट्ठी को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल को दिखाने को तैयार हैं। असद ने कहा कि इसी चिट्ठी में रची गई साजिश का विवरण है।
इस आरोप से पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत में कथित विदेशी हस्तक्षेप का बड़ा मुद्दा उठा है। यह मांग जोरदार ढंग से उठी है कि अगर ऐसी किसी साजिश की जानकारी सरकार के पास है, तो उसे इस मुद्दे पर देश को भरोसे में लेना चाहिए। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता शाहबाज शरीफ ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर साजिश की बात में दम हुआ, तो वे इमरान सरकार के समर्थन में खड़े दिखेंगे।
विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया है कि अगर देश के खिलाफ इतनी गंभीर चुनौती है, तो इमरान खान सरकार ने अब तक राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक क्यों नही बुलाई है? अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री के यह बयान देने के बाद से पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों में गहरी नाराजगी है। उन्होंने अपना नाम न छापने की शर्त पर अखबार से कहा कि अगर ऐसी किसी साजिश की जानकारी प्रधानमंत्री के पास है, तो उन्हें सार्वजनिक बयान देने से पहले विदेश मंत्रालय को भरोसे में लेना चाहिए था।