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पाकिस्तान में पोलियो रोधी अभियान रुका, दवा पिलाने वाले दल पर लगातार हो रहे थे हमले

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 27 Apr 2019 01:36 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

पाकिस्तान में पोलियो कर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच अब सरकार ने पोलियो रोधी अभियान पर रोक लगा दी है। इन कर्मियों पर किसी एक जिले में नहीं बल्कि पूरे देश में हमले हो रहे थे। ये रोक अनिश्चित अवधि के लिए लगाई गई है। 



मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक हफ्ते में इस अभियान से जुड़े तीन लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को दवा पिलाने के दल में शामिल दो महिलाओं नसरीन बीबी (35) और रशिदा (24) पर हमला किया गया। इस हमले में नसरीन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि रशिदा गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं दवा पिलाने वाले दल की सुरक्षा में लगे जो सुरक्षा कर्मी भी मारे गए हैं।


पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार को अभियान के बाद होने वाले मूल्यांकन को भी निलंबित करना पड़ा है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (ईओसी) फॉर पोलियो ने सभी प्रांतों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है।


ईओसी ने 2 लाख 70 हजार पोलियो फील्ड स्टाफ को हमलों से बचाने के लिए देशभर में पोलियो रोधी अभियान को रोकने का आदेश दिया। पाकिस्तान में इस अभियान की शुरुआत 22 अप्रैल से सभी जिलों में की गई थी। यहां अभियान शुरू होने के अगले दिन से ही दवा पिलाने वाले दल पर हमले शुरू हो गए। 


पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में 23 अप्रैल को अज्ञात बंदूकधारियों ने पोलियो रोधी दवा पिलाने वाले दल की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी इमरान खान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 


पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां पोलियो के सबसे अधिक मामले देखने को मिलते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने देश के 3.90 करोड़ बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का व्यापक अभियान शुरू किया था। 


पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान और नाइजीरिया में भी इस बीमारी का काफी प्रकोप देखने को मिलता है। यह दल खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले के बाचा खान चौक पर बच्चों को दवा पिलाने का काम कर रहा था। 
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दिसंबर 2012 के बाद से संक्रमणरोधी दवा देने वाले दलों पर हुए हमलों में 68 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, सोमवार को हुई एक अन्य घटना में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पोलियो रोधी दवा पीने के बाद अनेक स्कूली बच्चे बीमार पड़ गए जिन्हें अस्पताल ले जाया गया।


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