फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संकट में सबसे पुराना लोकतंत्र : मोदी समेत कई राष्ट्राध्यक्षों ने वाशिंगटन में हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त की

Thu, 07 Jan 2021 11:22 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
विज्ञापन
अमेरिकी हिंसा - फोटो : PTI
विज्ञापन

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव परिणाम को लेकर ट्रंप समर्थक और पुलिस के बीच कैपिटल परिसर में बुधवार को हुई खूनी झड़प की दुनियाभर में निंदा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्राध्यक्षों ने वाशिंगटन में हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। अमेरिका के अन्य सहयोगी देशों ने भी इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। हालांकि, कुछ ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था इससे उबर आएगी। कुछ नेताओं ने निर्वतमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना की।

विज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव वाशिंगटन डीसी के यूएस कैपिटल में हुई घटनाओं से दुखी हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि ऐसी स्थिति में, यह महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक नेता अपने समर्थकों को हिंसा से दूर रहने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून के शासन में विश्वास करने के लिए राजी करें।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने भी ट्वीट किया, ''वाशिंगटन डीसी के कैपिटल में आज जो हुआ, उससे काफी दुखी और चिंतित हूं। अमेरिका विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है। मेरा मानना है कि इस कठिन समय में हमारे मेजबान देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए शांति और सम्मान प्रबल होगा।''
विज्ञापन




मोदी ने कहा, ये लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका के वाशिंगटन में कैपिटल बिल्डिंग में हंगामा और हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि वाशिंगटन डीसी में हिंसा और दंगे की खबरों से चिंतित हूं। सत्ता का सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण हस्तांतरण जारी रहना चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गैरकानूनी प्रदर्शनों के जरिए बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ट्वीट किया, ''अमेरिकी संसद में अशोभनीय दृश्य देखने को मिले। अमेरिका विश्व भर में लोकतंत्र के लिए खड़ा रहता है। यह महत्वपूर्ण है कि सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण और तय प्रक्रिया के तहत उचित तरीके से हो।''

विज्ञापन

ट्रंप फैसले को स्वीकार करें 

जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास ने ट्विटर पर लिखा, ''ट्रंप और उनके समर्थकों को अमेरिकी मतदाताओं के फैसले को स्वीकार कर लेना चाहिए और लोकतंत्र पर हमला बंद करना चाहिए।भड़काऊ बयानों से हिंसक घटनाएं हुईं। लोकतांत्रिक संस्थाओं की अवहेलना का खतरनाक परिणाम होता है।''

इन नेताओं ने जताया भरोसा
नाइजीरिया के राष्ट्रपति के निजी सहायक बशीर अहमद ने ट्वीट किया कि क्या लोकतंत्र की यही खूबसूरती है? नाइजीरिया में कई दशक बाद लोकतांत्रित तरीके से मुहम्मद बुहारी के नेतृत्व में सरकार बनी है।
चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनेरा और कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक उन लैटिन अमेरिकी देशों के नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों की निंदा की। हालांकि, दोनों नेताओं ने भरोसा जताया कि अमेरिका में लोकतंत्र और कानून का शासन कायम रहेगा।

यह ट्रंपवाद का नतीजा 
इटली में भी लोगों ने हिंसा की घटना पर हैरानी जताई और कहा कि अमेरिका को हमेशा लोकतांत्रिक देश के मॉडल के तौर पर देखा जाता है। इटली के वामपंथी नेता (सेवानिवृत्त) पीरलुगी कास्तागनेती ने ट्वीट किया कि यह ‘ट्रंपवाद’ का नतीजा है।

 ट्रूडो ने भी की निंदा 
स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि यह देशद्रोह है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि उनका देश अमेरिका में कैपिटल परिसर में हुई हिंसा की घटना से ‘‘बहुत क्षुब्ध’’ है। कनाडा अमेरिका का करीबी सहयोगी देश रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें