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दावोस समिट: पीएम मोदी ने दिया 'वन अर्थ, वन हेल्थ' का मंत्र, बोले- भारत दुनिया को वैक्सीन-दवाइयां देकर करोड़ों जीवन बचा रहा

Mon, 17 Jan 2022 09:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दावोस/नई दिल्ली

सार

पीएम ने भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, "आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवाइयों का निर्माता है। एक तरह से भारत दुनिया के लिए दवा है। भारत जैसी मजबूत डेमोक्रेसी ने पूरे विश्व को एक खूबसूरत उपहार दिया है।
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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पीएम मोदी का संबोधन। - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ओर से आयोजित दावोस समिट को संबोधित किया। इसमें पीएम ने कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए भारत की तरफ से दुनिया को दी जा रही मदद के बारे में बताया। मोदी ने भारत के वन अर्थ, वन हेल्थ (One Earth, One Health) मंत्र का जिक्र करते हुए कहा कि  कोरोना के इस समय में हमने देखा है कि कैसे भारत अपने विजन पर चलते हुए अनेकों देशों को जरूरी दवाइयां, वैक्सीन देकर करोड़ों जीवन बचा रहा है।
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पीएम ने भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, "आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवाइयों का निर्माता है। एक तरह से भारत दुनिया के लिए दवा है। भारत जैसी मजबूत डेमोक्रेसी ने पूरे विश्व को एक खूबसूरत उपहार दिया है, एक उम्मीद का गुलदस्ता दिया है। इस गुलदस्ते में है, हम भारतीयों का डेमोक्रेसी पर अटूट विश्वास। इस गुलदस्ते में है 21वीं सदी का सशक्तीकरण करने वाली तकनीक। इस गुलदस्ते में है, हम भारतीयों का मिजाज, हम भारतीयों की प्रतिभा।"

अगले 25 सालों का लक्ष्य लेकर नीतियां बना रहा भारत
दावोस एजेंडा समिट के दौरान संबोधन में मोदी ने भारत के आगे के नजरिए को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, "आज भारत वर्तमान के साथ ही अगले 25 वर्षों के लक्ष्य को लेकर नीतियां बना रहा है, निर्णय ले रहा है। इस कालखंड में भारत ने उच्च विकास के, कल्याण से जुड़े लक्ष्य रखे गए हैं। विकास का ये कालखंड हरित भी होगा, स्वच्छ भी होगा, टिकाऊ भी होगा, भरोसेमंद भी होगा।
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'अर्थव्यवस्था को गोल बनाना जरूरी'
मोदी ने अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों पर कहा, "हमें ये मानना होगा कि हमारी जीवनशैली भी जलवायु के लिए बड़ी चुनौती है। फेंक देने की संस्कृति और उपभोक्तावाद ने जलवायु चुनौतियों को और बड़ा और गंभीर बना दिया है। आज की जो टेक, मेक, यूज और डिस्पोज इकोनॉमी है,  उसको तेज़ी से सर्कुलर इकोनॉमी (गोल अर्थव्यवस्था) की तरफ बढ़ाना बहुत ज़रूरी है।"

'हर तरफ बढ़ रही चुनौतियां, साथ में आकर समान सोच से इनसे निपटना होगा'
"आज वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के साथ ही एक वैश्विक परिवार के तौर पर हम जिन चुनौतियों का सामना करते रहे हैं, वो भी बढ़ रही हैं। इनसे मुकाबला करने के लिए हर देश, हर वैश्विक एजेंसी को साझा और चरणबद्ध कार्रवाई की जरूरत है। ये सप्लाई चेन के गतिरोध, महंगाई, और जलवायु परिवर्तन इन्हीं के उदाहरण हैं। एक और उदाहरण है- क्रिप्टोकरेंसी का। जिस तरह की टेक्नोलॉजी इससे जुड़ी है, उसमें किसी एक देश द्वारा लिए गए फैसले, इसकी चुनौतियों से निपटने में अपर्याप्त होंगे। हमें एक समान सोच रखनी होगी।"
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