रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सरकारी मीडिया ने घमंड के साथ अपने आर्थिक प्रभुत्व पर जोर देते हुए अपने देश के बहिष्कार को आत्मघाती अभियान बताया था, लेकिन भारत बीजिंग को गलत साबित करने वाला विश्व का पहला मुख्य देश बन रहा है।
रिपोर्ट में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की तरफ से देश के अमीर उद्योगपतियों से की गई चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील का जिक्र किया गया है तो साथ ही भारत सरकार की तरफ से उत्पादों पर उसे बनाने वाले देश का नाम ‘मेड इन’ के तौर पर लिखने की अनिवार्यता के बारे में भी बताया गया है।
साथ ही उन रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है, जिनमें कहा गया था कि भारत न केवल चीनी उत्पादों को बल्कि एपल जैसी अमेरिकी कंपनियों की तरफ से चीन में बनवाकर लाए जा रहे उत्पादों को भी अपने बाजार में प्रवेश करने से रोक रहा है।
ब्रेटबर्ट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि नई दिल्ली की तरफ से चीन के बहिष्कार के लिए उठाए गए मजबूत कदम ने दिखाया है कि कम्युनिस्ट पार्टी को अपनी सप्लाई चेन से हटाना कोई फैंटेसी नहीं है।
रिपोर्ट में सवाल उठाते हुए कहा गया है कि जब भारत यह कर सकता है तो आधुनिक चीन का निर्माण करने वाली मुक्त व्यापार नीतियों से तबाह अमेरिकी भी जल्द ही महसूस कर सकते हैं कि अमेरिका भी ऐसा कर सकता है।
चीन फिलहाल विश्व के किसी अन्य हिस्से से ज्यादा माल का उत्पादन करता है और केवल पूर्ण उत्पाद बल्कि दुनिया की सप्लाई चेन के सबसे जटिल उत्पादों के आवश्यक हिस्सों के निर्माण में एकाधिकार के जरिये स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को परास्त कर देता है। एंटीबायोटिक से लेकर कंप्यूटर तक, कोई भी, दुनिया में कहीं पर भी कुछ भी निर्मित करता है तो यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को समृद्ध बनाता है।