भारत और थाईलैंड रक्षा उद्योग क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने व द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए। आसियान शिखर सम्मेलन से इतर रविवार को पीएम मोदी ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत व थाईलैंड के संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर बताया, दोनों नेताओं ने बढ़ रहे हवाई संपर्क और कोलकाता, चेन्नई व विशाखापत्तनम में बंदरगाहों के बीच सहयोग के लिए समझौतों को अंतिम रूप देने का भी स्वागत किया। भारत और थाईलैंड ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रखने वाले करीबी समुद्री पड़ोसी हैं। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को थाईलैंड की ‘लुक वेस्ट’ नीति परिपूर्ण करती है। जिसने रिश्तों को गहरा, मजबूत और बहुआयामी बनाया है।
पीएम ने आसियान शिखर सम्मेलन से इतर रविवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद व कट्टरवाद से मिलकर मुकाबला करने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान पीएम ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के तौर पर दूसरा कार्यकाल शुरू करने पर विडोडो को बधाई दी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए आसियान देशों ने नई दिल्ली के साथ रणनीतिक संबंधों को व्यापक बनाने और आतंकवाद जैसी बड़ी चुनौती से सामूहिक रूप से निपटने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय की सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने रविवार को कहा, पीएम मोदी ने सालाना भारत-आसियान सम्मेलन में सीमापार आतंकवाद, हिंसक कट्टरवाद और दक्षिण चीन सागर की स्थिति का मुद्दे पर बात की और क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों से निपटने को लेकर भारत-आसियान के सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया।
सिंह ने कहा कि पहली भारत आसियान देशों ने भारत प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को स्वीकार किया। सभी देशों ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता में भारत की भूमिका काफी अहम है। यह आसियान का व्यापक दृष्टिकोण है।
इससे पहले, चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने कहा कि उनका देश दक्षिण चीन सागर में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने को लेकर आसियान के साथ काम करने को तैयार है। सिंह ने कहा कि सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर के मुद्दा भी उठा और दोनों पक्षों ने क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन करने पर जोर दिया गया।