प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन CDRI को वीडियो मैसेज के जरिए संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ढाई साल के कम समय में सीआरडीआई ने महत्वपूर्ण पहल की है और बहुमूल्य योगदान दिया है। पिछले साल COP26 में शुरू की गई 'इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफ रिसाइलेंट आईलैंड स्टेट्स' पहल छोटे द्वीप देशों के साथ काम करने की हमारी प्रतिबद्धता की स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
पीएम ने कहा कि सतत विकास का लक्ष्य है किसी को पीछे नहीं छोड़ना, इसलिए हम अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का निर्माण करने, सबसे गरीब और कमजोर लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर केवल पैसे बनाने और निवेश पर लंबी अवधि के रिटर्न कमाने के लिए नहीं है। यह आंकड़ों के बारे में नहीं है। यह पैसे के बारे में नहीं है। यह लोगों के बारे में है। यह उन्हें समान तरीके से उच्च गुणवत्ता, भरोसेमंद और टिकाऊ सेवाएं प्रदान करने के बारे में है।
बुनियादी ढांचे के जरिये गरीब, कमजोर लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्रतिबद्ध : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आधुनिक प्रौद्योगिकी और ज्ञान के इस्तेमाल पर आधारित आपदा के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मौजूदा पीढ़ी को आपदा से बचाने में मदद मिलेगी बल्कि भावी पीढ़ी को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सतत विकास का लक्ष्य किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है। इसलिए हम अगली पीढ़ी के लिए इंफ्रास्टक्चर का निर्माण करने, सबसे गरीब और कमजोर लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पीएम ने वीडियो संदेश के जरिये आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के चौथे संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह एक साझा सपना और विजन है, जिसे हम हकीकत में बदल सकते हैं। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आपदा के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि आपदा के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापक अनुकूलन प्रयासों का केंद्रबिंदु हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ सिर्फ पूंजीगत एस्सेट्स का निर्माण और दीर्घावधि के लिए निवेश या रिटर्न हासिल करना नहीं है और न ही यह केवल आंकड़ों या धन के लिए है बल्कि यह जनता के लिए है। यह उन्हें समान तरीके से उच्च गुणवत्ता, भरोसेमंद और टिकाऊ सेवाएं प्रदान करने के बारे में है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की कहानी के केंद्र में होनी चाहिए जनता
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की किसी भी कहानी के केंद्र में जनता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत यही करने की कोशिश कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने का पानी, सफाई, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि के भारत की कोशिशों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी सीधा मुकाबला कर रहा है।
आपदा प्रतिरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गठजोड़ की सराहना
उन्होंने कहा कि इसलिए सीओपी-26 में हमने अपने विकासात्मक प्रयासों के समानांतर 2070 तक ‘नेट जीरो’ हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है। आपदा प्रतिरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गठजोड़ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ढाई साल से कम समय में सीडीआरआई ने महत्वपूर्ण पहल की है और बहुमूल्य योगदान दिया है। पिछले साल सीओपी26 में शुरू की गई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफ रिसाइलेंट आइलैंड स्टेट्स पहल छोटे द्वीप देशों के साथ काम करने की हमारी प्रतिबद्धता की स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
इन नेताओं ने भी किया संबोधित
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा और मेडागास्कर के राष्ट्रपति एंड्री निरिना राजेओलिना समेत अन्य हस्तियों ने भी इस सत्र को संबोधित किया।