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खबरें जो झकझोर देती हैं: सहमति से संबंध में भी इतनी हिंसा क्यों?

Wed, 04 Dec 2019 10:21 AM IST
Priyesh Mishra बीबीसी हिंदी
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महिला के खिलाफ हिंसा - फोटो : Social Media
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दुष्कर्म और शारीरिक हिंसा की खबरें हमें झकझोर देती हैं। लेकिन, बीबीसी रेडियो पांच के एक शोध अध्ययन में ब्रिटेन में 40 साल से कम उम्र की एक तिहाई से ज्यादा महिलाओं ने माना है कि सहमति से बनाए जा रहे शारीरिक संबंधों के दौरान पार्टनर ने उन्हें थप्पड़ मारा, गला दबाया, हाथ-पैर बांध दिए या फिर थूक दिया।

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इनमें से किसी भी तरह की हिंसा झेलने वाली महिलाओं में 20 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि इस दौरान वे काफी डर गईं या फिर अपसेट हो गईं। 23 साल की एना बताती हैं कि उन्हें तीन तीन अलग अलग मौकों पर अलग पार्टनर के साथ बनाए गए शारीरिक संबंधों के दौरान ऐसी हिंसा का सामना करना पड़ा।

उनके साथ इसकी शुरुआत बाल खींचने से हुई फिर थप्पड़ खाने पड़े और इसके बाद उनके पार्टनर ने उनका गला दबाने की कोशिश की। एना बताती हैं कि मैं काफी हैरान थी। मैं काफी असहज और भयभीत महसूस कर रही थी। अगर कोई आपको गली में थप्पड़ मारे या फिर गला दबाए तो यह उत्पीड़न का मामला बन सकता है।

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क्या है वजह?

एना ने जब इसके बारे में अपने दोस्तों से बातें कीं तो उन्हें पता चला कि यह एक सामान्य बात होती जा रही है। एना बताती हैं कि ज्यादातर लड़के इन कामों में सारे तरीके नहीं अपनाते हों लेकिन कम से कम एक काम तो करते ही हैं। एक दूसरे मौके पर उनके साथी ने उनका गला दबाने की कोशिश की थी, वह भी बिना सहमति के और बिना किसी चेतावनी के।

उनका एक पार्टनर इतने बलपूर्वक अंदाज में पेश आता था कि उनके शरीर पर जख्म के निशान उभर आते थे और वे कई दिनों तक दर्द महसूस करती थीं।

एना कहती हैं कि मुझे मालूम है कि कुछ महिलाएं कहेंगी कि वे ये सब पसंद करती हैं।00 लेकिन समस्या यह है कि पुरुष अनुमान लगाते हैं कि हर महिला ऐसा ही चाहती है।

रिसर्च कंपनी सेवांता कॉमरेज ने 18 से 39 साल की 2002 ब्रितानी महिलाओं से पूछा कि सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधो के दौरान क्या उन्हें किसी तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा है, जिसमें पार्टनर ने उन्हें थप्पड़ मारा हो या फिर गला दबाने की कोशिश की हो या हाथ-पैर बांध दिए या फिर थूक दिया, जो एकदम आवांछित भी रहा हो।

इस सैंपल साइज में ब्रिटेन के प्रत्येक हिस्से और हर आयु वर्ग की महिलाएं शामिल हों, इसका ध्यान रखा गया था। इनमें 38 प्रतिशत महिलाओं ने माना है कि उनके साथ ऐसी हिंसा होती है और इनमें कुछ मौकों पर तो यह बिलकुल अवांछित होती है।

वहीं 31 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि कई बार ऐसी हिंसा अवांछित नहीं होती है जबकि 31 प्रतिशत महिलाओं ने कहा उन्हें ऐसा अनुभव नहीं हुआ है या फिर वे कुछ कहना नहीं चाहतीं।

शारीरिक संबंधों के दौरान हिंसक, खतरनाक होने का दबाव?

सेंटर फॉर वीमेंस जस्टिस ने बीबीसी को बताया है कि इन आंकड़ों से यह जाहिर होता है कि युवा महिलाओं पर सहमति के शारीरिक संबंधों के दौरान हिंसक, खतरनाक होने और खुद को नीचा दिखाने वाली हरकतें करने का दबाव बढ़ रहा है।

संस्था के मुताबिक, एक्स्ट्रीम स्तर वाली अश्लील फिल्म की सहज उपलब्धता, आम लोगों तक उसकी पहुंच और उसके इस्तेमाल के चलते ऐसा होने की आशंका है।

वीमेंस एड की कार्यकारी चीफ एक्जीक्यूटिव एडिना क्लेयर कहती हैं कि 40 साल से कम उम्र की महिलाओं को ना जाने कितनी बार शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है, खासकर उन पार्टनर से जिनके साथ वे सहमति से शारीरिक संबंध बनाती है, लेकिन तब भी वे डर में होती हैं, अपमानित होती हैं। शारीरिक संबंधों के लिए सहमत हो जाने के बाद भी हिंसा यानी थप्पड़ खाना, गला दबाने जैसी हिंसा होने की आशंका कम नहीं होती।

'मैं डर गई थी'

एमा की उम्र 30 साल से ज्यादा है और वे हाल फिलहाल लंबे समय के रिलेशनशिप से बाहर निकलीं हैं। इसके बाद उन्होंने किसी के साथ वन नाइट स्टैंड वाला संबंध बनाया। एमा बताती हैं कि हम बिस्तर पर पहुंच गए और इस दौरान बिना किसी चेतावनी के उसने मेरा गला दबाना शुरू कर दिया।

मैं सदमे में आ गई और काफी डर गई। मैंने उसे कुछ कहा नहीं क्योंकि उस वक्त मुझे लग रहा था कि वह मुझ पर जोर जबर्दस्ती कर सकता है। एमा के मुताबिक उसके पार्टनर का रवैया काफी हद तक अश्लील फिल्मों से प्रभावित था।

वह कहती हैं कि मुझे लगा है कि यह सब उसने ऑनलाइन देखा होगा और रियल लाइफ में भी उसे आजमाना चाहता है। इस रिसर्च में यह भी पता चला है कि सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों के दौरान हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में 42 प्रतिशत ने माना है कि उस वक्त उन्हें दबाव, मजबूरी या जोर जबर्दस्ती का भाव भी महसूस होता है।

हिंसा अब आम बात

स्टीवन पोप शारीरिक संबंध और रिलेशनशिप में विशेषज्ञता रखने वाले मनोचिकित्सक हैं। उन्होंने बीबीसी रेडियो 5 लाइव को बताया कि ऐसी हिंसा के नाकारात्मक प्रभावों पर वे लंबे समय से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह चुपचाप फैल चुकी महामारी है। लोग ऐसा करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सामान्य बात है, लेकिन यह काफी हानिकारक है। हमने कई मामलों में देखा है कि इससे रिलेशनशिप पर असर पड़ता है और सबसे खराब बात यहा है कि ऐसी हिंसा को महिलाएं स्वीकार करने लगती हैं।

स्टीवन पोप इस बात पर चिंता जताते हैं कि जो लोग ऐसी हिंसा करते हैं उन्हें इसके खतरे के बारे में मालूम नहीं होता। लोग जब मरने से बचते हैं तब मेरे पास आते हैं। गला दबाने पर जब उनका दम घुटना खतरनाक स्तर को पार कर जाता है तो कई बार वे लंबे समय तक बेहोश भी हो जाते हैं। यह हमेशा खतरनाक होता है लेकिन लोग इसके बारे में नहीं सोचते हैं।
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वी कैन नॉट कंसेंट टू दिस कैंपेन

इस मुद्दे पर कैंपेन चलाने वाली फियोना मैकेंजी सर्वे के निष्कर्ष को काफी भयावह बताती हैं। फियोना कहती हैं कि मुझे नियमित तौर पर ऐसी महिलाएं मिल रही हैं जिन्हें सहमति से बनाए शारीरिक संबंधों के दौरान ऐसी हिंसा का सामना करना पड़ा है या फिर उन्हें मौखिक दुर्व्यवहार झेलना पड़ा। कई मामलों में तो महिलाओं को शुरुआत में इसका पता हीं नहीं चलता है कि यह उत्पीड़न है।

फियोना ने जब सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों में हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी तो उन्होंने एक कैंपेन समूह- वी कैन नॉट कंसेंट टू दिस, शुरू किया। उनके मुताबिक कई मामले ऐसे थे जिसमें शारीरिक संबंधों में दौरान कई महिलाओं की हत्या तक हो गई है और सहमति का इस्तेमाल बचाव के लिए किया गया।

एना बताती हैं कि शारीरिक काफी हद तक पुरुष केंद्रित हो चुका है, इस पर अश्लील फिल्म का इतना ज्यादा असर है कि इसमें महिलाओं के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है।

एना ये भी बताती हैं कि शारीरिक संबंधों के दौरान हिंसा अब आम बात है। वे कहती हैं कि वे आम लड़के होते हैं। उनमें अलग कुछ नहीं होता है, लेकिन मेरे ख्याल से वे अश्लील फिल्में बहुत ज्यादा देखते हैं। वे इसे देखते हैं और अनुमान लगा लेते हैं कि महिलाएं ऐसा ही चाहती हैं, वो भी बिना पूछे।
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