फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूएन में गरजा भारत, आतंक के जनक पाक से नहीं सीखने आदर्श, तुर्की को भी सुनाई खरी-खोटी

Wed, 16 Sep 2020 01:13 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
विज्ञापन
भारत ने पाक को सुनाई खरी-खरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर पाकिस्तान के कश्मीर में मानवाधिकार की दुहाई देने पर भारत ने उसे करारी फटकार लगाई है। भारत यूएन के मंच से साफ तौर पर पूरी दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद के जन्मदाता और अपने यहां अल्पसंख्यकों को सताने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर देश से हमें मानवाधिकार के आदर्श सीखने की जरूरत नहीं है। भारत ने पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए तुर्की को भी खूब खरी-खोटी सुनाई।

विज्ञापन


यूएन की मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र के दौरान पाकिस्तान, तुर्की और ओआईसी ने कश्मीर को लेकर कई झूठे आरोप लगाए जाने को लेकर भारत ने ऐतराज जताया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत इंद्रमणि पांडे ने उत्तर देने के अधिकार के तहत बोलते हुए कहा, मानवाधिकार को भारतीय संविधान में मूल नागरिक अधिकार के तौर पर शामिल किए गया है। अगस्त, 2019 में किए गए बदलाव के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लोगों को वही मूल अधिकार मिले हैं, जो भारत के किसी भी दूसरे हिस्से में नागरिकों के पास मौजूद हैं और वे कोविड-19 महामारी के बावजूद लोकतांत्रिक तरीके से गति पकड़ रहे सामाजिक व आर्थिक विकास का पूरा लुत्फ ले रहे हैं। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए हुए कहा, यह सब एक देश की तरफ से विकास की प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए आतंकियों की घुसपैठ कराने के बावजूद हो रहा है।

पांडे के अलावा भारतीय स्थायी मिशन के प्रथम सचिव पवन बाथे ने भी उत्तर देने के अधिकार के तहत कहा, अपने बेतुके लक्ष्य के लिए झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के जरिए भारत को बदनाम करने की साजिश रचना पाकिस्तान की आदत बन गई है। खुद पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में लोगों की दुर्दशा उसके मानवाधिकार के मामलों की पोल खोलती हैं।
विज्ञापन


उन्होंने कहा, भारत ही नहीं, दुनिया का कोई भी देश किसी ऐसे देश से मानवाधिकार पर भाषण नहीं सुनना चाहेगा, जो अपने जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार सताता हो। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकियों को पेंशन देने में गर्व महसूस करने वाले पाकिस्तान के पास ऐसा प्रधानमंत्री है, जो जम्मू-कश्मीर में लड़ने के लिए हजारों आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने की बात स्वीकारने को गौरव का विषय मानता है। उन्होंने तुर्की को भी कश्मीर पर टिप्पणी करने के लिए स्पष्ट चेतावनी दी। भारतीय मिशन के प्रथम सचिव ने कहा कि मैं फिर से तुर्की को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से परहेज करने की सलाह देता हूं।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों को लेकर भारत या अन्य देशों को ऐसे देश से भाषण सुनने की जरूरत नहीं है जिसने लगातार अपने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए हैं, जो आतंकवाद का केंद्रबिंदु बना हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल लोगों को पेंशन दे रहा है और जिसका प्रधानमंत्री गर्व से जम्मू-कश्मीर में लड़ाई के लिए हजारों आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात को गर्व से स्वीकार करता है।

ओआईसी न कराए पाक के हाथों अपना दुरुपयोग
भारत ने इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) को भी पाकिस्तान के हाथों अपना दुरुपयोग कराने को लेकर चेताया। ओआईसी की तरफ से कश्मीर मुद्दे पर दिए बयान की आलोचना करते हुए भारत ने यूएन मानवाधिकार परिषद की बैठक में कहा, हम जम्मू-कश्मीर को ओआईसी की तरफ से दिए गए संदर्भ को अस्वीकार करते हैं। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ओआईसी ने पाकिस्तानी एजेंडे को पूरा करने के लिए अपने दुरुपयोग की अनुमति दी है, लेकिन उसे यह सोचना चाहिए कि क्या यह उनके हित में है।
विज्ञापन


 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें