सिंधु जल पर स्थायी आयोग (पीसीआईडब्ल्यू) के तहत इस्लामाबाद में हुई भारत-पाक अफसरों की एक वार्षिक बैठक में दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि उन्हें पश्चिमी जलविद्युत परियोजनाओं पर अतिरिक्त डाटा प्रदान किया जाए। दोनों देशों के बीच तीन दिनी बैठक में सभी तरह के मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें भारत ने पाकिस्तान को 15 से 20 अतिरिक्त आपत्तियों की सूची भी सौंपी।
डॉन अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान ने 10 परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई थी जिनमें कुलन रामवरी, तमाशा हाइड्रो, बाल्टिीकुलन, दरबुक श्योक आदि शामिल हैं। इनमें से नौ 25 मेगावाट और उससे कम की लघु विद्योत परियोजना श्रेणी में हैं। इन पर भारत द्वारा साझा किए गए डाटा पर पाकिस्तान ने खामियां बताईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रांतीय व राज्य सरकारों में आमतौर पर छोटी परियोजनाओं के मामले में डिजाइन और इंजीनियरिंग को लेकर कुछ कमी होती है लेकिन 1960 की सिंधु जल संधि के तहत जरूरी दस्तावेजों को अपडेट करने के लिए संबंधित निकायों से संपर्क किया जाएगा। इस बैठक में दोनों पक्ष खुले दिमाग से आपत्तियों की जांच करने के लिए सहमत हुए। साथ ही पाकिस्तान चालू वर्ष में अपने टीम के दौरे पर भी सहमत हुआ। भारतीय दल का नेतृत्व आयुक्त पीके सक्सेन ने किया।
बैठक के दौरान पक्षों के बीच फजिल्का नाले पर भी विमर्श हुआ। पाकिस्तान ने आश्वासन दिया कि वह फजिल्का नाले से सतलुज में मुक्त प्रवाह के लिए सभी जरूरी कदम उठाना जारी रखेगा। बैठक में दोनों देशों के बीच बाढ़ से बचने के लिए जल का डाटा उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी।
अगली बैठक दिल्ली में बुलाने पर सहमति
सिंधु जल पर स्थायी आयोग की अगली बैठक दिल्ली में बुलाने पर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बन गई है। इस्लामाबाद में 1 से 3 मार्च तक हुई दोनों देशों की बैठक में इस पर सहमति जताई गई। दोनों देशों की सहूलियत के हिसाब इस बैठक की तिथियां तय की जाएंगी।
हर साल आयोग की एक बैठक होनी जरूरी
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता वर्ष 1960 में हुआ था। इसमें प्रावधान है कि दोनों देशों के आयुक्तों की हर साल कम से कम एक बैठक होनी जरूरी है। पिछली बैठक 23-24 मार्च 2021 को नई दिल्ली में हुई थी।