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पेगासस मामला: व्हाट्सएप के प्रमुख ने कहा- गैरजवाबदेह निगरानी पर लगे रोक 

Tue, 20 Jul 2021 08:56 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा कि व्हाट्सएप एंड टू एंड एंक्रिप्शन के जरिए लोगों की निजता बचाने का काम कर रहा है। लेकिन एनएसओ जैसे समूह इस सुरक्षा को जानबूझकर कमजोर कर रहे हैंं, जिसके सभी के लिए भयानक परिणाम हो सकते हैं।
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whatsapp - फोटो : amarujala
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विस्तार
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व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा, पेगासस के गलत इस्तेमाल को लेकर हो रहे खुलासे इंटरनेट पर सुरक्षा में कमी का संकेत हैं। इसके लिए सभी कंपनियों व सरकारों को गंभीर कदम उठाते हुए एनएसओ समूह को जवाबदेह ठहराना चाहिए।

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उन्होंने वैश्विक स्तर पर गैरजवाबदेह निगरानी तकनीक के इस्तेमाल पर रोक लगाने की भी सिफारिश की है। विल कैथकार्ट ने कहा कि व्हाट्सएप एंड टू एंड एंक्रिप्शन के जरिए लोगों की निजता बचाने का काम कर रहा है। लेकिन एनएसओ जैसे समूह इस सुरक्षा को जानबूझकर कमजोर कर रहे हैंं, जिसके सभी के लिए भयानक परिणाम हो सकते हैं।

पेगासस मामला अत्यंत चेतावनीपूर्ण: यूएन 
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग ने कहा, पेगासस जासूसी कांड कई देशों के लिए अत्यंत चेतावनीपूर्ण है और संबंधित देशों को निजता पर ऐसे हमलों के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए।
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पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, राजनेताओं और अन्य बुद्धिजीवियों की जासूसी के लिए सॉफ्टवेयर का व्यापक इस्तेमाल दर्शाता है कि लोगों के मानवाधिकारों का अवैध रूप से दमन करने के लिए सबसे घटिया तरीके से  निगरानी तकनीक का दुरुपयोग किया गया है।

जानिए कितना खतरनाक है जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस, मिस कॉल से भी फोन में पहुंच सकता है
इस्राइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस फोन में एक सामान्य व्हाट्सएप कॉल से भी पहुंच सकता है। जिसको कॉल की गई है, वह जवाब दे या न दे, उसके फोन में यह पहुंच जाएगा। यह फोन में विभिन्न लॉग एंट्री डिलीट कर देता है, जिससे इसकी मौजूदगी का पता नहीं चलता। इसके विभिन्न पहलुओं को इस प्रकार समझें...

वर्ष 2013 से अस्तित्व में
इस्राइली कंपनी एनएसओ ने पेगासस को विकसित करने के बाद विभिन्न देशों की सरकारों को बेचना शुरू किया। 2013 में सालाना 4 करोड़ डॉलर कमाने वाली इस कंपनी की कमाई 2015 तक करीब चार गुना बढ़ 15.5 करोड़ डॉलर हो गई। सॉफ्टवेयर काफी महंगा माना जाता है, इसलिए सामान्य संगठन और संस्थान इसे खरीद नहीं पाते।

2016 में पहली बार अरब देशों में काम कर रहे कार्यकर्ताओं के आईफोन में इसका इस्तेमाल उजागर हुआ। बचाव के लिए एपल ने तत्काल आईओएस अपडेट कर सुरक्षा खामियां दूर कीं। एक साल बाद एंड्रॉयड में भी पेगासस से जासूसी के मामले सामने आने लगे। 2019 में फेसबुक के सुरक्षा विशेषज्ञों ने पेगासस को एक बड़ा खतरा बताते हुए केस दायर किया। इसी दौरान व्हाट्सएप ने भारत में कई कार्यकर्ता और पत्रकारों के फोन में इसके उपयोग का खुलासा किया।

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