अफगानिस्तान-तालिबान शांति वार्ता
- फोटो : पीटीआई
कतर में शनिवार से तालिबान और अफगान सरकार के बीच शांति वार्ता की शुरुआत हो गई। अफगानिस्तान के लिए शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे पूर्व मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने तत्काल प्रभाव से युद्धविराम पर जोर दिया। उन्होंने जंग में होने वाली मौतों का जिक्र करते हुए कहा, फरवरी में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति वार्ता समझौते के बाद संघर्ष में 12 हजार नागरिकों की मौत हुई है और 15 हजार जख्मी हुए हैं।
दोहा में वार्ता के शुभारंभ के मौके पर अब्दुल्ला ने कहा, हमें हिंसा रोकनी होगी। जितनी जल्द हो सके युद्धविराम पर सहमति बनानी होगी। हम युद्धविराम चाहते हैं। वार्ता की शुरुआत के मौके पर अब्दुल्ला के साथ तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी मौजूद थे।
बरादर 21 सदस्यीय तालिबान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष स्थायी संघर्ष विराम, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार और हजारों तालिबान लड़ाकों के निरस्त्रीकरण पर वार्ता करेंगे। संवैधानिक संशोधनों और सत्ता बंटवारे पर भी बातचीत कर सकते हैं। यह वार्ता 9/11 की 19वीं बरसी के एक दिन बाद शुरू हुई है, जिस हमले ने अमेरिका को अफगानिस्तान पर हमला करने और तालिबान को खत्म करने के लिए उकसाया था।
तालिबान ने रिहा किए 22 अफगान सैनिक
तालिबान ने सद्भावना के रूप में शनिवार को बंधक बनाए 22 अफगान सैनिकों को रिहा किया। तालिबान ने कहा, विभिन्न मुठभेड़ों के दौरान पकड़े गए सैनिकों को तालिबान की जेलों से रिहा कर दिया गया है। इन सभी को हेलमंद प्रांत में अलग-अलग जगहों पर कैद कर रखा गया था। अफगान सरकार और तालिबान की वार्ता को सकारात्मक बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।