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Ceasefire: संघर्ष विराम उल्लंघन के दावों के बावजूद थाईलैंड-कंबोडिया में शांति; अमेरिकी दबाव के बीच तनाव बरकरार

Wed, 30 Jul 2025 08:23 AM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सुरीन

सार

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच संघर्ष की शुरुआत पिछले गुरुवार को हुई जब सीमा पर एक लैंड माइंस विस्फोट में पांच थाई सैनिक घायल हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले करने का आरोप लगाया। अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। मलयेशिया में अमेरिकी दबाव में दोनों देश युद्ध विराम पर सहमत हुए। 
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थाईलैंड कंबोडिया में संघर्ष विराम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पांच दिनों तक चला खूनी संघर्ष अब थमने लगा है। दोनों देशों के बीच अमेरिकी दबाव में हुआ युद्ध विराम कायम है। लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर गोलीबारी करने का आरोप करा रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कायम है। मलयेशिया में हुए संघर्ष विराम के बावजूद थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया पर मंगलवार तड़के कई इलाकों में हमले करने का आरोप लगाया। हालांकि कंबोडिया ने कहा कि किसी भी जगह गोलीबारी नहीं हुई।
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मंगलवार देर रात थाई सरकार ने कहा कि उन जगहों में से एक पर फिर से झड़प शुरू हो गई है जहां पहले भीषण लड़ाई हुई थी। थाई सेना ने बुधवार सुबह तक गोलीबारी की सूचना दी। थाईलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता जिरायु होंगसुब ने कहा कि थाई सेना थाईलैंड के सिसाकेट प्रांत के निकट विवादित क्षेत्र में स्थित फु मखुएआ पर्वत पर प्रतिक्रिया दे रही है और स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

थाईलैंड की सेना ने कहा था कि दोनों पक्षों के सीमावर्ती सैन्य कमांडरों की बैठक के बाद सुबह की लड़ाई रुक गई। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विन्थाई सुवारी ने बताया कि वे चार अगस्त को कंबोडिया में होने वाली संयुक्त सीमा समिति की बैठक से पहले सैनिकों की आवाजाही रोकने, तनाव बढ़ने से बचने और समन्वय दल बनाने पर सहमत हुए।
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कंबोडियाई रक्षा मंत्री टी सेइहा ने कहा कि उन्होंने अपने थाई समकक्ष से युद्धविराम के हुई घटनाओं के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि कंबोडियाई सेना युद्धविराम का पालन कर रही है। कंबोडियाई रक्षा अधिकारी राजनयिकों, विदेशी सैन्य अताशे और अन्य लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ स्थिति का निरीक्षण करेंगे।

जबकि थाईलैंड सरकार ने कहा कि उसने कंबोडिया की ओर से युद्ध विराम समझौते के उल्लंघन के बारे में मलयेशिया, अमेरिका और चीन से शिकायत की है। हालांकि सीमा पर शांति के संकेत मिले हैं, तथा लड़ाई के कारण विस्थापित हुए 260,000 से अधिक लोग अपने घरों को लौट रहे हैं।

मलयेशिया की भूमिका और अमेरिका का दबाव
सोमवार को हुए इस समझौते में मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मध्यस्थता की। उन्होंने इस युद्धविराम को तनाव कम करने और सुरक्षा बहाल करने की दिशा में अहम पहला कदम बताया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और मैं दोनों इस संघर्ष को तुरंत रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं और दोनों सरकारों से समझौते का पूरा पालन करने की उम्मीद करते हैं। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट और थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने सोमवार को लड़ाई को बिना शर्त रोकने पर सहमति व्यक्त की थी। इसमें कम से कम 41 लोग मारे गए हैं।

कंबोडिया के पीएम को ट्रंप ने किया फोन
कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने कहा कि उनको ट्रंप ने शांति पहल के लिए बधाई देने के लिए फोन किया था। ट्रंप ने वादा किया है कि अमेरिका मलयेशिया के साथ मिलकर निगरानी प्रक्रिया में शामिल होगा ताकि युद्धविराम का पालन सुनिश्चित हो सके। ट्रंप ने थाईलैंड के पीएम फुमथम को भी फोन किया। फुमथम ने बताया कि ट्रंप ने उन्हें बताया कि थाईलैंड के निर्यात पर टैरिफ के स्तर पर बातचीत के लिए थाईलैंड और वाशिंगटन के बीच बातचीत अब आगे बढ़ सकती है और वह इसे यथासंभव अनुकूल बनाने का प्रयास करेंगे। ट्रंप ने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि यदि शत्रुता जारी रही तो अमेरिका किसी भी देश के साथ व्यापार समझौते पर आगे नहीं बढ़ सकेगा। 



पुराना सीमा विवाद पर नई राजनीति
ताजा संघर्ष की शुरुआत पिछले गुरुवार को हुई जब सीमा पर एक लैंड माइंस विस्फोट में पांच थाई सैनिक घायल हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले करने का आरोप लगाया। अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2.6 लाख लोग दोनों देशों में विस्थापित हो चुके हैं। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 800 किलोमीटर लंबी सीमा दशकों से विवाद का विषय रही है। हालांकि अब तक टकराव सीमित और छोटे पैमाने पर ही रहे हैं। लेकिन मई में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद हालात बिगड़ने लगे। इस घटना ने थाईलैंड की घरेलू राजनीति को भी प्रभावित किया और कूटनीतिक तनाव को बढ़ा दिया।
 
लोगों ने युद्ध विराम के फैसले का किया स्वागत
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा के दोनों ओर के निवासियों ने युद्ध विराम पर राहत व्यक्त की। लेकिन वे चिंतित हैं क्योंकि उन्हें यह पता नहीं है कि यह शांति कितने समय तक कायम रहेगी। स्थानीय निवासी सोकलांग स्ले ने कहा कि मुझे बहुत चिंता है कि नई लड़ाई छिड़ सकती है। थाईलैंड अक्सर पहले लड़ाई भड़काता है, लेकिन फिर कंबोडिया पर आरोप लगाता है। उनका मकसद हमारे मंदिरों पर कब्जा करना है। मैं सचमुच कोई नई लड़ाई नहीं देखना चाहता।

थाईलैंड के सुरीन प्रांत में गांव के मुखिया क्रित्सादा जिंदासरी ने बताया कि उन्होंने सोमवार रात को भारी गोलीबारी और विस्फोटों की आवाज सुनी। इसके बाद आधी रात को सन्नाटा छा गया। उन्होंने कहा कि हम अभी भी सतर्क हैं। हमें अभी भी पूरी तरह से विश्वास नहीं है कि यह रुकेगा। हम अभी भी स्थिति का आकलन करने का इंतजार कर रहे हैं। 

विशेषज्ञ बोले युद्ध विराम अभी जटिल
विशेषज्ञों ने कहा कि युद्धविराम अभी भी अस्थिर और राजनीतिक रूप से जटिल है। कंबोडियाई शोधकर्ता कोकथाय इंग ने कहा कि ट्रंप की व्यापारिक ताकत और मजबूत मानसिकता ने थाई और कंबोडियाई लोगों को आगे के रक्तपात से बचाने में मदद की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि थाई सरकार अमेरिका से कम टैरिफ प्राप्त करने में असफल रहती है तो युद्ध विराम लंबे समय तक नहीं टिकेगा।
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