इस 11 सदस्यीय समिति का गठन मिलन कुमार थापा के नेतृत्व में सरकार ने 23 अक्तूबर 2017 को किया था। थापा ने कहा, 'ट्रस्ट की कई स्थानों पर जमीन है। लेकिन, पर्याप्त सबूत न होने के चलते हम इन्हें ट्रस्ट के अंतर्गत नहीं ला पाए हैं।' थापा ने चिंता जताते हुए कहा कि विभिन्न स्थानों पर ट्रस्ट से संबंधित भूखंडों पर अतिक्रमण कर लिया गया है।
अपनी कुल पंजीकृत भूमि में से ट्रस्ट ने 59 हेक्टेयर भूमि त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और एक गोल्फ कोर्स को 99 साल के लिए 50 लाख रुपये के वार्षिक किराए पर लीज पर दी है। इसी तरह, ट्रस्ट ने 0.86 हेक्टेयर भूमि बौध में एक पांच सितारा होटल हयात रीजेंसी को लीज पर दी है। गोठटार में ट्रस्ट के पास 27 हेक्टेयर भूमि है जिसे सरकार ने साल 1998 में ट्रस्ट के नाम पंजीकृत किया था। साल 2002 से 2013 के बीच ट्रस्ट ने मंदिर के पास 76.5 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की है।
ट्रस्ट के सदस्य सचिव पदीप ढाकल ने कहा कि बुधवार को की गई घोषणा मंदिर की संपत्ति को सार्वजनिक करने की दिशा में पहला कदम है। ठाकल ने कहा कि चूंकि, पशुपतिनाथ सार्वजनिक संपत्ति है, कई लोग यह जरूर जानना चाहते हैं कि ट्रस्ट अपनी संपत्ति का प्रबंधन कैसे करता है।
पांचवीं शताब्दी का पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल का सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट में शामिल कई लोग अपनी नेपाल यात्रा के दौरान मंदिर गए हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पशुपतिनाथ के दर्शन करने जाते हैं।