पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) के बंजर पहाड़ियों के बीच खड़े लाल बॉक्स के कारखाने में, चैट कोला के कर्मचारी स्थानीय उत्पादों की मांग पूरी करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। यह मांग पिछले साल गाजा युद्ध के शुरू होने के बाद बढ़ गई है। चैट कोला, जो कोका-कोला के मशहूर लाल और सफेद डिब्बों की पैकेजिंग जैसी दिखती है, ने उन फलस्तीनियों का ध्यान खींचा है, जो इस्राइल का समर्थन करने वाले ब्रांड्स को छोड़ना चाहते हैं।
चैट कोला की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी
फलस्तीन में चैट कोला की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि इस्राइल से युद्ध शुरू होने के बाद से स्थानीय लोगों ने इस्राइल से जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर बहिष्कार करना शुरू दिया है। चैट कोला एक गुणवत्तापूर्ण फलस्तीनी विकल्प है। इसके निर्माता, फाहद अरार, का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। रामल्लाह और अन्य शहरों में दुकानों और रेस्तरां में विदेशी ब्रांड्स की जगह लोकल प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस्राइली उत्पादों पर निर्भर फलस्तीनी अर्थव्यवस्था
हालांकि, फलस्तीनी अर्थव्यवस्था इस्राइली उत्पादों पर बहुत हद तक निर्भर है, जिससे बड़े पैमाने पर बहिष्कार करना कठिन है। फिर भी, लोगों की स्थानीय उत्पादों को खरीदने की रुचि बढ़ रही है, खासकर अगर वे अच्छी गुणवत्ता और उचित कीमत पर उपलब्ध हों। चैट कोला के उत्पादन में कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे कच्चे माल की कमी क्योंकि इस्राइली सीमा पर इसे रोक दिया गया। लेकिन फिलिस्तीनी स्वाद के रूप में इसकी पहचान मजबूत हो रही है, और इसे क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंचाने की भी योजना है।
स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग
रामल्लाह शहर के एक रेस्टोरेंट मालिक जूलियन ने कहा कि उन्होंने कोका-कोला के ब्रांड वाले फ्रिज को चैट कोला से भर दिया है। वहीं, सुपरमार्केट के मैनेजर महमूद सिदर ने कहा, अरबी और फलस्तीनी उत्पादों की बिक्री में पिछले साल तेजी आई है। हालांकि, कोका-कोला इस्राइली सैनिकों को मुफ्त सामान नहीं देता है, लेकिन इसे अमेरिकी ब्रांड होने के कारण इस्राइल समर्थक माना जाता है।
बहिष्कार आंदोलन का क्या पड़ रहा प्रभाव
फहद अरार का कहना है कि राष्ट्रीय बहिष्कार अभियान ने बड़ा प्रभाव डाला है। फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था मंत्रालय के उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख इब्राहीम अल-कादी ने बताया कि पिछले तीन महीनों में इस्राइल के उत्पादों की 300 टन मात्रा खराब होने के बाद नष्ट कर दी गई, क्योंकि उन्हें खरीदने वाले नहीं मिले।