Israel-Palestine Row: इस्राइल और फलस्तीन के बीच तनावपूर्ण माहौल है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि इस्राइल को 'काम खत्म' करना होगा। नेतन्याहू के इस बयान को फलस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबु शावेश ने खतरनाक बताया है। इस्राइल से तनाव और पश्चिम एशिया के मौजूदा हाल पर उन्होंने और भी अहम बातें कहीं।
भारत में फलस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि फलिस्तीन मुद्दे को तार्किक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी 24 अक्तूबर 2023 को हमास हमले की निंदा करते हुए कहा था कि यह 'शून्य में' नहीं हुआ, बल्कि यह लंबे समय से चले आ रहे इस्राइली कब्जे और फलस्तीनी लोगों के अपमान की पृष्ठभूमि में हुआ। शावेश के मुताबिक यही तर्कसंगत सोच भी है।
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नेतन्याहू के इरादे क्यों खतरनाक हैं, 'काम पूरा' के मायने क्या?
बता दें कि इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कहा था कि इस्राइल को 'गाजा में काम पूरा करना ही होगा।' उनके इस बयान के बाद रविवार को दिल्ली में 'नरसंहार और गाजा की अपंगता' (Genocide and Gaza's Disabled) विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान शावेश ने कहा, जब नेतन्याहू ने कहा कि 'इस्राइल को काम पूरा करना ही होगा' तो उसका असली अर्थ फलस्तीनियों को उनकी जमीन से बेदखल करना और बचे हुए लगभग 42 लाख फलस्तीनि लोगों का 'जातीय शुद्धिकरण' है। ऐसे विचार बेहद खतरनाक हैं।
गाजा में अब तक 1.5 लाख टन विस्फोटक... प्रति व्यक्ति 75 KG
उन्होंने कहा, यह पहली बार है जब दुनिया भर के लोग अपने स्मार्टफोन पर प्रत्यक्ष जनसंहार देख रहे हैं। गाजा में 365 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अब तक 1.5 लाख टन विस्फोटक गिराए गए हैं। इस जगह पर 23 लाख निर्दोष लोग रहते हैं। इसका सीधा मतलब है प्रति व्यक्ति लगभग 75 किलो विस्फोटक गिराए गए हैं।
पश्चिमी देशों की मिलीभगत, इस्राइल हमास का सफाया करने के साथ-साथ...
शावेश ने आरोप लगाया कि जो कुछ हो रहा है, यह पश्चिमी देशों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में नेतन्याहू के बयान से स्पष्ट है कि लक्ष्य केवल हमास का सफाया नहीं बल्कि पूरे फलस्तीनी समाज को उनकी ऐतिहासिक भूमि से उखाड़ फेंकना है।