पाकिस्तान के रावलपिंडी सैन्य अस्पताल में हुए एक धमाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के घायल होने की खबरें आई हैं। हैरानी की बात तो ये है कि 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स' (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को दी गई चेतावनी के महज दो दिन बाद ये घटना हुई है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अक्तूबर तक अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने या कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है, जिसके तहत उसे काली सूची में डाला जा सकता है।
इस खबर पर पाकिस्तान का पूरा मीडिया चुप है। हालांकि घटना से संबंधित वीडियो और तस्वीरें पाकिस्तानी लोगों द्वारा ट्विटर पर खूब शेयर की जा रही हैं। सोशल मीडिया के दावे के मुताबिक इसमें 10 और लोग घायल हुए हैं। सख्ती के चलते ना तो मसूद के घायल होने की पुष्टि हुई और ना ही मीडिया को अस्पताल में जाने दिया गया।
इससे पहले मार्च में खबरें आई थीं कि आतंकी मसूद अजहर बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारा गया है। ये एयर स्ट्राइक पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने जैश के ठिकानों पर की थी। लेकिन जब ऐसी खबरें आईं, तो पाकिस्तान ने इसे कवर करते हुए कहा कि मसूद अजहर बीमार है और उसका इलाज सैन्य अस्पताल में चल रहा है।
रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि अजहर इस हमले में घायल हुआ है लेकिन फिलहाल उसकी स्थिति क्या है, इसपर पाकिस्तान खामोश है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है अस्पताल पर ये हमला भी पाकिस्तान ने खुद ही कराया हो। ताकि कुछ समय बाद वह अजहर की मौत की पुष्टि कर दे।
क्वेटा के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता अहसानल्लाह मियाखेल का दावा है कि अस्पताल प्रशासन यहां सख्ती इसलिए बरत रहा है क्योंकि वहां कई ऐसे लोग हैं जिनका नाम मीडिया में आने से बवाल हो सकता है। उन्होंने ही ट्विटर पर दावा किया कि इसी अस्पताल में जैश सरगना मसूद अजहर भी भर्ती था। बताया गया कि मीडिया को किसी भी तरह की खबरें न छापने को भी कहा गया है। मियाखेल के ट्वीट के बाद लगातार पाकिस्तानी लोग ही कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।
इस खबर के साथ ही कार्यकर्ता ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें इमारत से धुंआ निकलता दिख रहा है। इस खबर को लेकर और कोई जानकारी सामने नहीं आ रही है।
अजहर भारत में पुलवामा सहित कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। चाहे पठानकोट हमला हो या फिर उरी हमला, सबमें इसी का हाथ रहा है। 14 फरवरी को जैश ने ही आतंकी आदिल अहमद डार का वीडियो जारी किया, जिसमें उसने पुलवामा हमले की पूरी जिम्मेदारी ली।
जनवरी, 2016 को पठानकोट हमले में 7 भारतीय जवानों की जान भी इसी संगठन ने ली। इसके अलावा सितंबर 2016 में भी हुए उरी हमले के पीछे भी इस संगठन का हाथ था। इस हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हुए थे।