गौरतलब है कि पाकिस्तान की सरकार अभी तक जनता को जो करों में राहत दे रही थी, उसे वापस लेना होगा। इसके अलावा नए करों को लागू करना है। यही नहीं, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सरकार को सरकारी नौकरियों में भी कटौती करनी होगी, ताकि सरकार पर आर्थिक बोझ कम हो सके। जिसके बाद से ही विरोध हो रहा है।
बंद पर कारोबारी संगठनों का कहना है कि उन्हें इससे आपत्ति नहीं है कि सरकार कर दायरे को बढ़ाना चाहती है, लेकिन यहां बल प्रयोग किया जा रहा है जो मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में उद्योग-धंधों की हालत खस्ता है।
कारोबारियों के संगठन ऑल पाकिस्तान मरकजी अंजुमन-ए-ताजिरान के अध्यक्ष अजमल बलोच ने इस्लामाबाद में कहा कि यह हड़ताल सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि आईएमएफ के निर्देश पर बजट में किए गए ‘कारोबारी विरोधी’ कर प्रावधान के खिलाफ है।