जिस दिन पाकिस्तान में भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को हिरासत में लिया गया था, उसी वक्त पाकिस्तानी सुरक्षा बल खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पश्तून नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे। पश्तून सूत्रों के मुताबिक इन बैठकों में अधिकारियों ने आदिवासियों से एक सेना बनाने को कहा है। यह एक बेहद गंभीर बात है। क्योंकि इससे पहले भी पाकिस्तान कश्मीर को हासिल करने के लिए कबायली सेना का इस्तेमाल कर चुका है।
इससे पहले 1947 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर चढ़ाई के लिए कबाइली घुसपैठियों का इस्तेमाल किया था। तब यहां के राजा हरि सिंह थे। इन घुसपैठियों ने कश्मीर में काफी तबाही मचाई थी। जब राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए तो भारत ने अपनी सेनाओं को भेजकर कश्मीर को इन घुसपैठियों से बचाया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पश्तून सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान आम लोगों को जंग के लिए तैयार करता रहा है, यह उसका इतिहास रहा है। सूत्र ने बताया कि पाकिस्तान ने पश्तून के बड़े-बुजुर्गों और कबाइली नेताओं से सुरक्षा के लिए सैन्य टुकड़ी और शांति समितियां तैयार करने को कहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र का कहना है कि 27 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों की झड़प के बाद पाकिस्तानी सेना ने मारवात और बेटानी आदिवासियों को उनके हथियार वापस दे दिए। ये हथियार उनसे दो साल पहले जब्त किए गए थे। पाकिस्तान के एक स्थानीय अखबार के अनुसार ब्रिगेडिर वकस जफर राजा और बाकी अधिकारियों ने 27 फरवरी को स्थानीय नेताओं और अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी। यहां कई कबाइली जिलों में बैठक की गईं।
कई लोगों ने अपने नाम अधिकारियों को दे दिए हैं और भारत और पकिस्तान की अगर जंग होती है, तो इन लोगों ने पाकिस्तान का साथ देने की बात कही है। लेकिन यहां के युवा पाकिस्तानी सेना का समर्थन नहीं करना चाहते। क्योंकि वो मंजूर पश्तीन नाम के मशहूर नेता के समर्थन में हैं। पश्तीन 'पश्तून तहाफुज मूवमेंट' का नेता है और वह इलाके में पाक सेना के सैन्य अभियान के खिलाफ है।