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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का आतंक?: सुरक्षा बलों पर अपहरण-हत्याओं के आरोप, मानवाधिकार संगठन ने खोली पोल

Fri, 27 Feb 2026 11:24 PM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, क्वेटा।

सार

जनवरी में बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन लगातार बढ़े हैं। बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) के अनुसार, 107 लोग जबरन गायब किए गए और 78 की हत्या हुई। पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स सबसे अधिक मामलों में शामिल रही। विभिन्न जिलों में अपहरण और हत्याओं की घटनाएं दर्ज हुईं। पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बढ़ते अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि जनवरी में 107 लोगों को जबरन गायब किया गया और 78 की हत्या की गई।
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जनवरी में कितनी जबरन गुमशुदगियां और हत्याएं हुईं?
अपनी ताजा रिपोर्ट में बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने 107 जबरन गुमशुदगी के मामलों को दर्ज किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज 107 मामलों में से 78 लोगों को घरों पर छापेमारी के दौरान अगवा किया गया, जबकि 29 को दूसरे तरीकों से हिरासत में लिया गया।

रिपोर्ट में कथित जिम्मेदार पक्षों के संदर्भ में कहा गया कि पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) 56 मामलों के साथ सबसे अधिक अपहरण में शामिल रही। इसके बाद खुफिया एजेंसियां 32 मामलों में, आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) 12 मामलों में और पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड सात घटनाओं में शामिल बताए गए।
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जिलेवार आंकड़े क्या हैं?
जिलों के अनुसार, केच में सबसे अधिक 28 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद क्वेटा में 20 मामले सामने आए। ग्वादर और पंजगुर में क्रमशः 17 और 14 अपहरण दर्ज किए गए। इसके अलावा, खारान में नौ, खुजदार में छह, कराची में चार, हब और आवारान में तीन-तीन, डेरा बुगती में दो और मस्तुंग में एक मामला दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में बलूचिस्तान भर में कुल 78 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें 77 पुरुष और एक महिला शामिल थे। 44 पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।

एचआरसीबी ने कहा, दर्ज 78 मामलों में कथित मुठभेड़ सबसे अधिक रहीं, जिनकी संख्या 41 थी। इसके बाद 15 फर्जी मुठभेड़ के मामले सामने आए। ड्रोन हमलों में आठ लोगों की मौत हुई, जबकि टारगेट किलिंग और हिरासत में मौत के छह-छह मामले दर्ज किए गए। ऑनर किलिंग सबसे कम रहीं, जिनके दो मामले सामने आए। 

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पाकिस्तानी सेना सबसे अधिक जिम्मेदार
रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना को 41 घटनाओं के साथ सबसे अधिक जिम्मेदार बताया गया। सीडीटी 13 मामलों में और फ्रंटियर कॉर्प्स 11 मामलों में शामिल रही, जबकि डेथ स्क्वॉड और अज्ञात हमलावरों को पांच-पांच घटनाओं से जोड़ा गया।
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बलूच यकजहती कमेटी ने क्या कहा?
इसी बीच, मानवाधिकार संगठन बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान का अत्यधिक सैन्यीकरण किया गया है और पाकिस्तानी सैन्य चौकियां न केवल राजमार्गों पर बल्कि प्रांत के प्रमुख शहरों के भीतर भी स्थापित की गई हैं। बीवाईसी ने कहा, कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर सकता। सैन्य चौकियों पर डराना-धमकाना, अपमान और जबरन गुमशुदगियां आम हैं। सैन्य छापेमारी रोजाना जारी है। सैन्य बल घरों में घुस जाते हैं, स्थानीय आबादी को परेशान और प्रताड़ित करते हैं, कीमती सामान लूट लेते हैं और घरों को तोड़ देते या जला देते हैं। 

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