पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। पाकिस्तानी मीडिया ने इस विषय को प्रमुखता से लिया है और उसकी कहानी सबके सामने बयां की है।
पाकिस्तान में शुक्रवार को हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है। इस बात की पुष्टि एक महिला ने की। पाकिस्तान के थट्टा में रहने वाली 30 वर्षीय एम्मी ने अपने उत्पीड़न की दास्तां सुनाई तो पाकिस्तान की सरकार और वहां की पुलिस किस स्तर तक गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर सकती है? इसका पता चला।
जबरदस्ती धर्मातंरण और बलात्कार का शिकार हुई 30 वर्षीय एम्मी अब न्याय के लिए वहां की एनजीओ और मीडिया की मदद से लड़ाई लड़ रही है।
डॉन की खबर के मुताबिक एम्मी जब अपने साथ हुए बर्ताव के मामले के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने गई तो पुलिस ने उसको मना कर दिया। यही नही लिखित में पाकिस्तान की सरकार में शिकायत करने के बाद वहां की सरकार ने भी उसका साथ नहीं दिया और अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
एम्मी ने बताया कि थट्टा पुलिस थाने में जब वो शिकायत दर्ज करवाने गई तो किसी ने मुझे गंभीरता से नहीं लिया और मुझ पर हंसने लगे। मददगार हेल्पलाइन की मदद से दर्ज करवाई गई प्रेस कांफ्रेंस में यह बात एम्मी ने कही। उसने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि पुलिस ने भी उसका यौन उत्पीड़न किया। पिछले आठ साल से मेरा उत्पीड़न किया जा रहा है और अभी तक मुझको इंसाफ नहीं मिला है। इतनी बात कहकर एम्मी रोने लगी और अपना चेहरा झुका लिया।
हिदूं धर्म से इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया
एम्मी की मुश्किल तब से बढ़ी जब वो वर्ष 2008 में फोन के जरिए मीरपुर सकरो के रहने वाले शहबाज के संपर्क में आई। शहबाज के कहने पर जब एम्मी उससे मिलने गई तो उसने अपने मित्र रमजान की मदद से उसका अपहरण कर लिया।
एम्मी ने बताया कि वो मुझे एक अंजान जगह पर ले गए और 20 दिनों तक अंधेरे कमरे में रखकर मुझे मार-पीटा और मेरे साथ बलात्कार किया। इसके बाद मुझे बेच दिया गया और नवाबशाह ले जाया गया।
नवाबशाह में एम्मी को जबरदस्ती हिदूं धर्म से इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया। साथ ही फर्जी तरीके से जावेद खासखेली के निकाह करवा दिया गया। बाद में मुझे वेश्यावृत्ति के धंधे में ढकेल दिया गया।
उसने दो बार भागने की कोशिश की, पर वो पकड़ी गई और उसे सजा मिली। मै जल गई थी। इसलिए मुझे नवाबशाह के एक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। बाद में पाकिस्तान स्थित हैदराबाद के कंबाइड मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। मुझे बताया गया था कि मैं खुद को जावेद की पत्नी के रूप परिचय कराने को मजबूर किया गया। बाद में मुझे जहर भी दिया गया।
'अपहरण के बाद उसके पिता की सदमे से मौत हो गई'
छह साल हैदराबाद में रहने के दौरान उसने तीन लड़कियों से मुलाकात की तो पता चला कि वेश्वावृत्ति के लिए उन्हें लाया गया है। इस साल ईद के दूसरे दिन एम्मी भागने में सफल रही और अपने थट्टा स्थित घर पहुंची। वह उस समय सदमे में आ गई जब उसे पता चला कि उसके अपहरण के बाद उसके पिता की सदमे से मौत हो गई।
उसके बाद में अपने एक मित्र की मदद से कराची स्थित कोर्ट पहुंची। वहां पर किसी ने मुझे मददगार हेल्पलाइन के बारे में बताया। मीडिया के साथ बातचीत में एम्मी ने राष्ट्रीय पहचान पत्र और फोटो समेत कई सबूत पेश किए। एम्मी के एडवोकेट जिया अवान ने एम्मी के मामले का केस तैयार किया और पुलिस अधिकारियों से मिलकर इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश भी की। पर उन्हें नाकामयाबी ही हासिल हुई।
थट्टा की पुलिस ने कहा कि यह मामला उनकी सीमा में नहीं आता है। इस मामले के लिए मीरपुर सकरो पुलिस से संपर्क करना चाहिए। दोनों ही थानों ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया। पर शिकायत ले ली थी।
जिया अवान ने बताया कि एनजीओ को सरकार की तरफ से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। पाकिस्तान की संस्कृति मंत्री शर्मिला फारूखी की तरफ से भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद ही इस मामले को मीडिया के सामने लाने का फैसला किया गया। अभी तक हमारे तरफ से किए गए सारे प्रयास बेकार चले गए।