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ट्रंप-किम से सीख ले भारत, कश्मीर मसले पर बातचीत से दूर हो सकती है पाक से दुश्मनी: शरीफ

Wed, 13 Jun 2018 06:04 PM IST
एजेंसी, लाहौर
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सिंगापुर में ट्रंप-किम को बीच ऐतिहासिक शिखर वार्ता से पाकिस्तान में नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के प्रमुख और नवाज के भाई शाहबाज शरीफ काफी उत्साहित हैं। 

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उन्होंने कहा है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया की तरह भारत-पाक को भी व्यापक शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए। पार्टी द्वारा आम चुनाव में पाक पीएम के लिए प्रस्तावित उम्मीदवार शाहबाज ने कश्मीर मुद्दा भी छेड़ते हुए इसी मसले के साथ भारत-पाक वार्ता शुरू करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप-किम ने दोनों पड़ोसियों के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश किया है।

मंगलवार को सिंगापुर में उत्तर कोरियाई नेता ने अमेरिका द्वारा सुरक्षा गारंटी के बदले पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने का वादा किया है। शाहबाज शरीफ ने ट्वीट किया, ‘यदि अमेरिका और उत्तर कोरिया परमाणु मसले पर विवाद के मुहाने से लौट सकते हैं तो ऐसी कोई वजह नहीं कि भारत-पाक ऐसा नहीं कर सकते। 
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उन्होंने कहा, ‘यह समय हमारे क्षेत्र में व्यापक शांति वार्ता का है। हालांकि शरीफ ने यहां भी कश्मीर का राग नहीं छोड़ा और कहा कि भारत-पाक वार्ता की शुरुआत कश्मीर पर बातचीत से हो जहां के बहादुर लोग भारत के कब्जे का विरोध करते रहे हैं।’

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तनावों को पीछे छोड़कर नए सिरे से वार्ता शुरू करें

- फोटो : amar ujala
शाहबाज ने कहा कि कश्मीर पर भारत-पाक वार्ता फिर से शुरू होनी चाहिए ताकि इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत हल किया जा सके। अपने बड़े भाई नवाज शरीफ से उलट भारत पर शहबाज शरीफ का यह बयान अपने आप में यह दुर्लभ बात है।

पाक राजनीतिज्ञों के मुताबिक नवाज शरीफ को पद से हटाने के पीछे भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने के उनके प्रयास भी एक वजह थे। शहबाज ने अपील की कि भारत चिर प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पहले के तनावों को पीछे छोड़कर नए सिरे से वार्ता शुरू करें। 

भारत-पाक के लिए आदर्श हो ट्रंप-किम वार्ता

शाहबाज शरीफ ने कहा, ‘अमेरिका और उत्तर कोरिया की वार्ता भारत-पाक के लिए आदर्श होनी चाहिए। अगर वे एक-दूसरे पर हमले की अपनी पुरानी शत्रुतापूर्ण स्थिति से पीछे हट सकते हैं तो भारत और पाक भी समग्र संवाद बहाल कर सकते हैं।’ पीएमएल-एन प्रमुख ने कहा कि 25 जुलाई को होने वाले चुनावों में अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह अफगानिस्तान पर फोकस करने के साथ क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देंगे।
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