ये पहला मौका है जब मैं पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची के ल्यारी इलाके की यात्रा कर रही हूं। ल्यारी कराची की वो जगह है, जहां अलग-अलग नस्लों के कई समुदाय रहते हैं और इनके बीच में बस एक चीज कॉमन है- वो है गरीबी।
यहां आते हुए मुझे थोड़ा अजीब महसूस हो रहा था क्योंकि कुछ साल पहले तक यहां बाहरी लोगों का आना सुरक्षित नहीं माना जाता था। क्योंकि यहां की गलियां खूनखराबे का संघर्ष का शिकार रही हैं। स्थानीय पुलिस के लिए भी इस इलाके में पहुंचना संभव नहीं होता था।
लेकिन पाकिस्तान की पैरा-मिलिट्री फोर्स ने एक लंबा अभियान चलाने के बाद इस इलाके से अराजक तत्वों को उखाड़ फेंका था। इसके बाद यह इलाका आम लोगों के जाने लायक बन गया है।
महिलाओं का पहला बॉक्सिंग क्लब
मैं इस इलाके के पहले महिला बॉक्सिंग क्लब में कुछ युवा लड़कियों से मिलने आई हूं, जो अपनी बॉक्सिंग के दम पर खुद को सशक्त बनाने का सपना देख रही हैं। हर दिन स्कूल खत्म होने के बाद करीब दो दर्जन लड़कियां पाक शाहीन बॉक्सिंग क्लब में पहुंचती हैं। पंचिंग बैग में घूंसे चलाती हुई ये लड़कियां बॉक्सिंग की मदद से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं।
एक पुरानी सी इमारत में बने इस क्लब में बॉक्सिंग रिंग समेत वे सभी चीज़ें मौजूद हैं जो इस शहर के कई बॉक्सिंग क्लबों में दिखाई नहीं पड़ती हैं। क्लब की एक दीवार पर अमरीकी बॉक्सर मोहम्मद अली की तस्वीर टंगी है और दूसरी दीवार पर बॉक्सिंग ग्लव्स टंगे हुए दिखाई पड़ते हैं।
'मुझे ओलंपिक खिलाड़ी बनना है'
13 साल की आलिया सूमरो इस क्लब की सबसे जोशीली बॉक्सर हैं जिन्हें अब तक कोई भी हरा नहीं पाया है।
मोहम्मद अली को अपनी प्रेरणा बताने वाली आलिया कहती हैं, "एक दिन मैंने मोहम्मद अली की फाइट देखी। ये देखना शानदार था जिस तरह वह अपना सीधा हाथ इस्तेमाल करते हैं। मैं भी उनकी तरह बनना चाहती हूं। उन्होंने तीन चैंपियनशिप जीती थीं। मैं पांच चैंपियनशिप जीतना चाहती हूं।"
किसी भी 13 साल की लड़की की तरह आलिया भी बेफिक्र नज़र आती हैं।
आलिया कहती हैं, "अभी भी लड़कियों के लिए कई सीमाएं हैं। उन्हें उनके परिवार की ओर से इजाजत नहीं मिलती है। लेकिन मैं उन लड़कियों में शामिल नहीं हूं। मेरे पिता एक फुटबॉल खिलाड़ी हैं और वह मेरा पूरा समर्थन करते हैं।"
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनके लिए बॉक्सिंग करना कोई आसान काम रहा होगा।
वह बताती हैं, "जब मैं अपना पहला मैच खेल रही थी तो लोगों ने मेरी बेइज्जती की और रिंग में बॉक्सिंग करने की जगह मुझे घर पर रहने, नमाज और कुरान पढ़ने के लिए कहा। मेरे पिता का मजाक उड़ाया गया कि उन्होंने मुझे बॉक्सिंग में क्यों डाला।"
सभी चुनौतियों के बावजूद आलिया भविष्य के लिए आशान्वित रहते हुए कहती हैं, "मैं एक दिन ओलंपिक खिलाड़ी बनूंगी।"