राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल उरी के आर्मी कैम्प हमले की जांच में सहयोग और सबूत जुटाने के लिए पाकिस्तान से औपरचारिक सहयोग मांगा है। आतंकी हमले में सेना के 19 जवान शहीद हुए थे। हमले के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक भी की थी।
जांच एजेंसी ने इस मामले में पाकिस्तान से औपचारिक न्यायिक सहायता का अनुरोध किया है। एजेंसी ने अपने अनुरोध में आतंकी अनस के डीएनए नमूने, आतंकियों से मिली दवाइयों, कपड़े, जूते, सामान आदि का ब्योरा मांगा है।
बता दें कि हमले के 9 महीने बीत जाने के बावजूद चार आतंकवादियों मे से अभी तक सिर्फ एक की ही पहचान हो सकी है। जिस एक एकमात्र आतंकी की पहचान की गई है उसका नाम अबू अनास है।
एनआईए पाकिस्तान से बाकी तीन आतंकियों की पहचान और उन्हें सीमा पार भेजने वाले आलाकमान के बारे में भी जानना चाहता है। एजेंसी का कहना है कि इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है हालांकि सेना ने कई मौकों पर जैश-ए-मोहम्मद को इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
सरकार के अधिकारियों को शक है कि एनआईए के इस अनुरोध पर पाकिस्तान की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी भी या नहीं, क्योंकि अक्सर ऐसे अनुरोध पर पाकिस्तान का रवैया नकारात्मक ही रहा है।
गृह मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि 'यदि पाकिस्तान उरी हमले से जुड़े सबूतों को भारत को देता है तो ऐसा करना उसका भारत में आतंकवाद को प्रायोजित करने और जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी को बढ़ावा देकर अस्थिर करने वाली नीति के समर्थन के खिलाफ होगा।'