तीन से ज्यादा साल पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के आंतकियों द्वारा भारत पर हमला करने को लेकर सवाल पूछे थे। जिन दो अधिकारियों ने मुंबई हमलों की जांच की थी उन्होंने पीएमएल-एन की सरकार से आग्रह किया था कि वह पंजाब प्रांत के लशकर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
फेडरल जांच एजेंसी के प्रमुख तारीक खोसा और एक पाकिस्तान के इज्जतदार पुलिस अधिकारी ने पीएमएल-एन सरकार से कहा था कि उन्हें आतंकवाद के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार करे। तालिबानी आतंकियों ने पेशावर में 16 दिसंबर, 2014 को सेना द्वारा संचालित किए जाने वाले एक स्कूल में नरसंहार को अंजाम दिया था। खोसा से बातचीत के बाद नेशनल काउंटर-टेररिज्म रणनीति बनाई गई। इसे सरकार से मंजूरी भी मिल गई थी।
आंतकियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए इस ग्रुप में आंतरिक मंत्री चौधरी निसार अली खान भी शामिल थे। जिसके बाद फैसला लिया गया कि पंजाब प्रांत को अपना गढ़ बना चुके एलईटी और जेईएम का सफाया किया जाए। मगर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई क्योंकि एनजीओ की आड़ में यह संगठन आतंकी गतिविधियों का काम करते हैं। इसके लिए विदेशों से फंड जमा करते हैं। हालांकि पेशावर नरसंहार के बाद आतंकियों पर कार्रवाई की गई लेकिन एलईटी और जेईएम को व्यापक तौर पर कभी निशाना नहीं बनाया गया। यह सारी बातें खोसा ने अपनी कितान द फाल्टरिंग स्टेट में लिखी हैं।
बता दें कि कुछ समय पहले ही
नवाज शरीफ ने इस बात को स्वीकार किया था कि
मुंबई हमलों में पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ था। खोसा ने अपनी किताब में अजमल कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने की बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा है कि जहां वह रहता था और जहां से उसने स्कूल की पढ़ाई की थी वह पाकिस्तान में ही थीं। यहां तक की यहीं वह आतंकी संगठन में शामिल हुआ था।