पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के विद्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ आंतकवादियों का इस्तेमाल किया था। आज वही आतंकी सेना के लोकप्रिय लोगों और नेताओं को अपना निशाना बना रहे हैं। आज सेना के दांव पेंच उसी पर उल्टे पड़ते जा रहे हैं।
बलूचिस्तान है बेहद आवश्यक
बलूचिस्तान राज्य पाकिस्तान के लिए बेहद आवश्यक राज्य है। यहीं से पाकिस्तान को हर साल 7,000 करोड़ रुपये की आय होती है। एशिया में सबसे ज्यादा गैस, सोना और तांबा इसी राज्य में होता है। लेकिन बदले में यहां के लोगों को कुछ नहीं मिलता। यहां के विद्रोहियों का कहना है कि सेना उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अपना नियंत्रण रख रही है। जो कि ठीक नहीं है। साल 2004 के बाद से अब तक हजारों छात्र, विद्रोही और कार्यकर्ताओं को मारा गया है।
सुरक्षा एजेंसी ने इन विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए लश्कर और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल शुरू किया था। लेकिन जब यह सफल नहीं हुए तो आईएस ने मजबूर होकर सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया। वहीं पाकिस्तान सरकार भारत और अफगानिस्तान पर बलूच विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए आरोप लगाती रही है। सरकार का कहना है कि यही देश तालिबान को पाकिस्तान में सक्रिया बना रहे हैं।