पनापा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य करार दिए जाने के बाद नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वह तीसरी बार पीएम पद से हटाए गए लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। नवाज तीन बार प्रधानमंत्री बने जो किसी पाकिस्तानी नेता के लिए सबसे ज्यादा है।
नवाज इस पूरे मामले में सिर्फ इसलिए अयोग्य करार दिए गए क्योंकि वह अपने परिवार और अपनी लंदन स्थित संपत्ति का स्रोत नहीं बता पाएं। लेकिन हम आपको पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेता नवाज शरीफ की पनामा पेपर से लेकर पाक सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक की पूरी कहानी बता रहे हैं-
पनामा पेपर लीक
नवाज की मुसीबत इस पूरे मामले में चार साल पहले बढ़ी। खोजी पत्रकारों के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने पनामा मामले को उजागर किया। संगठन ने 4 अप्रैल, 2016 को एक करोड़ से ज्यादा दस्तावेज जारी कर पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। ये दस्तावेज मध्य अमेरिकी देश पनामा की एक लॉ फर्म मोजैक फोनसेका से संबंधित थे।
खोजी पत्रकारों ने इस अभियान में 1977 से 38 साल के आंकड़ों को खंगाला था। इसके तहत 2 लाख 14 हजार फर्जी कंपनियों से जुड़े 2.6 टेराबाइट डाटा की जांच की गई थी। इनमें पाकिस्तान के बर्खास्त प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिजनों के भी नाम थे।
नवाज जांच से गुजरने को तैयार
मामले में नाम सामने आते ही अगले ही दिन यानि 5 अप्रैल को नवाज शरीफ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए खुद को बेकसूर बताया। उन्होंने पनामा पेपर्स के आधार पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग की स्थापना की घोषणा कर दी।
वहीं इस घोषणा के दो हफ्ते बाद ही नवाज ने बताया कि पूरे मामले की जांच पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में होगी। उन्होंने कहा कि 'मैं और मेरा पूरा परिवार इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए तैयार हैं अगर हम पर आरोप साबित हुए तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।'