हक्कानी मलाला से इसलिए मिल पाए क्योंकि वह मिंगोरा के उस घर में रहते हैं जहां मलाला का परिवार रहा करता था। मलाला, उनके पिता जियाउद्दीन यूसुफजई, उनकी मां और दो भाई शनिवार को सेना के हेलिकॉप्टर से मिंगोरा पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री मरियम औरंगजेब भी थीं। दो दिन पहले
इस्लामाबाद आने के बाद उनके इस दौरे को लेकर कोई कयास नहीं लगाए गए थे। उन्होंने इलाके में केवल दो घंटे गुजारे और केवल दो जगहों पर गईं। सबसे पहले वह अपने पुराने घर गईं और यह यात्रा भावनात्मक घटना में बदल गई। हक्कानी कहते हैं, "जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा, उनके आंसू बहने लगे।" "जियाउद्दीन ने घर के बाग में सजदा किया। उन्होंने जमीन को चूमा और मिट्टी को उठाकर अपनी आंखों पर रगड़ लिया। कई मिनटों तक घर में खामोशी बनी रही।"
मलाला ने पड़ोस के अपने दोस्तों से मिलने की इच्छा जताई तो कड़ी सुरक्षा के बीच अधिकारी उन्हें लेकर आए। हक्कानी ने कहा कि उनकी मलाला से लंबी बातचीत हुई और वह उनके साथ हर कमरे में गईं जहां उन्होंने बताया कि उनका परिवार हर कमरे का इस्तेमाल कैसे किया करता था। हक्कानी ने कहा, "मैं देख सकता था कि उनके विचार परिपक्व हो गए हैं। उन्हें लगा कि सुरक्षा के कारण उन पर एक लगाम है और उन्होंने वादा किया कि वह अगली बार बिना सुरक्षा के आएंगी।"
मिंगोरा में अपने घर के अलावा वह सेना की ओर से चलाए जा रहे कैडेट कॉलेज गईं जहां वह छात्रों, स्टाफ से मिलीं और विज़िटर्स बुक में अपने विचार लिखे। उनके कुछ दोस्तों को भी वहां बुलाया गया था। कुछ सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उनसे न मिल पाने के कारण निराश भी हुए। स्वात के नजदीकी अपने पैतृक जिले शांगला में उनकी मदद से बने महिला कॉलेज की छात्राएं भी निराश हुईं। हालांकि, मीडिया में आए हर बयान में कहा गया कि वे उनकी मुश्किलें समझ सकते हैं वह अभी भी तालिबान के निशाने पर हैं।
पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति पर यह एक उपयुक्त टिप्पणी होगी। मलाला समेत कइयों ने उनके पाकिस्तान के दौरे को यहां की बेहतर सुरक्षा स्थिति का संकेत बताया है। लेकिन उनकी आवाजाही पर पाबंदी और उनके यात्रा कार्यक्रम में कड़ी सुरक्षा उन पर बरकरार खतरे को दिखाता है। मलाला के दौरे के दौरान उनके विरोधियों ने सोशल मीडिया पर अभियान भी छेड़ दिया। विरोधियों ने उन पर झांसा देने और दुश्मन ताकतों का एजेंट होने का आरोप तक लगाया। उनके देश और शक्तिशाली सेना ने भी ऐसे विचारों को बदलने के लिए कुछ नहीं किया है।
मलाला के पाकिस्तान आने की इच्छा को समझा जा सकता है लेकिन इस दौरे की किसने व्यवस्था की, प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी की सरकार या सैन्य नेतृत्व ने। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। लेकिन ये जरूर स्पष्ट है कि सेना और खुफिया विभाग ने उनकी सुरक्षा का जिम्मा उठाया था। ये बात समझ में आती है लेकिन सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि उनके कार्यक्रमों को जिस तरह तय किया गया वह पूर्वाग्रह दिखाता है।
सूत्रों की मानें तो, प्रशासन ने मलाला के दौरे के बारे में कुछ समूहों को चुपके से सतर्क कर दिया था। लेकिन उनके पिता के कई दोस्तों को अंधेरे में रखा गया था, जो उनकी राजनीति के दौर में अपने सैन्य विरोधी विचारों के लिए जाने जाते थे। कुछ गुटों ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि सेना अमेरिका के साथ तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की एक अच्छी छवि बनाना चाह रहा है। अमेरिका ने हाल में पाकिस्तान की सैन्य मदद को बंद कर दिया था।