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क्वेटा धमाका: ख़ुफ़िया एजेंसियों की 'नाकामी'

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पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के गवर्नर ने देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों और पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वे क्वेटा शहर में हुए शक्तिशाली बम धमाके के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहे हैं।
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शनिवार रात को हुए धमाके में कम से कम 81 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 178 ज़ख़्मी हैं। बलूचिस्तान के गवर्नर नवाब ज़ुल्फ़िक़ार मगसी ने जिओ न्यूज़ से कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियां और पुलिस प्रशासन या तो बहुत डरे हुए थे या फिर उन्हें पता ही नहीं था कि उन्हें करना क्या है।

जनवरी में हुए एक ऐसे ही हमले के बाद मगसी को ज्यादा अधिकार दिए गए थे। मगसी ने कहा कि कि उन्होंने चरमपंथियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को पूरे अधिकार दे रखे हैं लेकिन वे अपना काम करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।
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हर तरफ़ अफ़रातफ़री
गवर्नर ने कहा, “हर तरफ़ अफ़रातफ़री है और लग रहा है कि यहां क़ानून नाम की कोई चीज़ नहीं है। ऐसे हमलों को रोकना सुरक्षा बलों का काम है और उन्हें इसी बात के पैसे मिलते हैं।”

जनवरी में हुए इसी तरह के एक हमले में 92 लोग मारे गए थे जिसके बाद मुख्यमंत्री नवाब असलम रैसानी की सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया था और मागसी को प्रांत का मुख्य कार्यकारी बना दिया गया था।

फ्रंटियर कोर को प्रांत में क़ानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी दी गई है लेकिन ताज़ा हमले के बाद मागसी और अधिक सुरक्षा बलों की मांग कर सकते हैं।

इस बीच राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने मागसी से टेलीफ़ोन पर बात करके हज़ारा समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ हमले रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा है।

लश्कर-ए-झांगवी ने ली ज़िम्मेदारी
प्रतिबंधित सुन्नी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की है। इस हमले के विरोध में हज़ारा समुदाय के लोगों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए। हज़ारा डेमोक्रेटिक पार्टी ने रविवार को क्वेटा बंद का आह्वान किया गया है जिससे शहर में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

हज़ारा डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख अज़ीज़ुल्ला हज़ारा ने कहा है कि अगर 48 घंटे के भीतर इस धमाके में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिए जाएंगे।

शनिवार को हुए इस धमाके में परचून की कई दुकानें, स्कूल और एक कम्प्यूटर सेंटर नष्ट हो गए थे। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है क्योंकि कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है।

बलूचिस्तान प्रांत की सीमा ईरान और अफगानिस्तान से लगी हुई है और यह अलगाववाद के साथ साथ जातीय हिंसा से भी जूझ रहा है। पिछले कई सालों में यहां शिया हजारा समुदाय के सैकड़ों लोग मारे गए हैं।
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