बीजिंग में रविवार से चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) का तीन दिवसीय सम्मेलन शुरू हो चुका है। इस सम्मेलन में पाकिस्तान सहित 23 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
इसी बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे(सीपीईसी) के खिलाफ लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
गिलगिट, हुंजा, स्कर्दू और घिजेर के कई छात्र और राजनीतिक संगठन जैसे काराकोरम स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, बलवारिस्तान नेशनल स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, गिलगिट बाल्टिस्तान यूनाइडेट मूमेंट और बलवारिस्तान नेशनल फ्रंट शामिल हैं।
सीपीईसी को 'गुलामी की सड़क' बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चीन सीपीईजी प्रोजेक्ट के माध्यम से गिलगिट पर अवैध कब्जा करना चाहता है। प्रदर्शनकारी 'चीनी साम्राज्यवाद बंद हो' के पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने विश्व समुदाय से चीन की घुसपैठ रोकने की अपील की है।
बता दें कि बलूच नेता भी लगातार इसका विरोध करते रहे हैं। बलूच रिपब्लिकन पार्टी के नेता अशरफ शेरजन ने कहा था कि ओबीआर से जुड़ने वाले देशों से मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि कोई भी कदम उठाने से पहले वो बलूचिस्तान की स्थिति को ध्यान में रख लें।
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन के हित के बीच, इस प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान के लोगों के लिए कोई फायदा नहीं है। बलूचिस्तान के लोग पहले ही सीपीईसी को खारिज कर चुके हैं।