चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) चीन के गले की फांस बनता जा रहा है। पाकिस्तान में सीपीईसी में अनियमितता और करप्शन की खबरों से वहां के ज्यादातर राजनीतिक दल नाराज हैं तो इसे लेकर चीन की चिंता आए दिन उभरकर सामने आ रही है। एक दिन पहले इस प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान में चीन के राजदूत मीडियाकर्मियों पर बिफरे तो इसके अगले ही दिन अब चीनी मंत्री को पाक के राजनीतिक दलों का सहयोग मांगना पड़ा।
चीन के उपविदेश मंत्री झेंग झियोसोंग ने पाक-चाइना इंस्टिट्यूट में भाषण के दौरान कहा, 'पाकिस्तान में राजनीतिक दलों के हितों में विभिन्नता है। हमें उम्मीद है कि राजनीतिक दल अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करेंगे और सीपीईसी को सफल बनाएंगे। चीनी मंत्री ने पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के नेताओं से भी मिले और उन्हें चीन आने का न्योता दिया।
दरअसल, चीन सीपीईसी प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहा है। इसे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फ्लैगशिप योजना के तौर पर देखा जा रहा है। सीपीईसी पर चीन विदेश में अब तक का अपना सबसे बड़ा निवेश कर रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन इस प्रोजेक्ट पर करीब 46 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर रहा है।
चीन के इस प्रोजेक्ट पर दुनियाभर की नजर है। एक और रूस ने अपने पुराने साझीदार भारत को नाराज कर इससे प्रोजेक्ट से जुड़ने में दिलचस्पी दिखाई है तो भारत इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी नाराजगी जता चुका है। दूसरी ओर, अमेरिका भी इस प्रोजेक्ट पर नजर रख रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान के भीतर ही राजनीतिक दलों के बीच गहरी खाई बन गई है जो चीन के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।