पेशावर के कब्रिस्तान में छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को दफनाते हुए कब्र खोदने वाले की आंखें भी नम हो गईं। कब्र खोदने वाले ने बताया, "जीवन में पहली बार मैं अपनी आंखों के आंसू रोक नहीं पाया, मैं बयां नहीं कर सकता, लेकिन मैं रोया। मैं जानता हूं कि हमारे पेशे के मुताबिक यह नियमों के खिलाफ है मगर यह एक ऐसा क्षण था जब मुझे नियमों को तोड़ना पड़ा।" गौरतलब है कि वह उन बच्चों को दफना रहा था पेशावर के सैनिक स्कूल में हुए हमलों में मारे गए थे।
कब्र खोदने वाले ताज मुहम्मद ने बताया कि पेशावर की सबसे बड़ी कब्रगाह का एक नियम है। उसने बताया कि वो शवों को दफनाने के दौरान कभी नहीं रोया था क्योंकि वह एक पेशेवर है। लेकिन उसने बताया कि जो 148 शव उसके सामने थे वो उन छोटे छोटे बच्चों के थे जो सीधे स्कूल से आ रहे थे और जिन्हें पाकिस्तान के तालिबानी आतंकियों ने पेशावर के सैनिक स्कूल में हमले के दौरान मौत के घाट उतार दिया था।
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मुहम्मद ने बताया कि मैने अलग अलग उम्र के और अलग अलग वजन के बच्चों को दफनाया। उसने बताया कि इन शवों को दफनाने के दौरान जिस तरह का अहसास हो रहा था वैसा उसे कभी भी किसी शव को दफनाने के दौरान नहीं हुआ। मुहम्मद ने बताया कि शव को दफनाने के दौरान ही उसने अपने सहयोगियों और बच्चों के साथ जो उसके साथ पेशावर की रहमान बाबा कब्रगाह में काम करते थे, ग्रीन टी पी।
पेशावर के सैनिक स्कूल में हुआ था बड़ा हमला
पेशावर के सैनिक स्कूल में हुए हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। आत्मघाती दस्तों से लैस आतंकियों ने सैनिक स्कूल में मौत का खतरनाक खेल खेला था। काफी देर चलने वाला यह खूनी खेल उस वक्त थमा था जब सुरक्षा बलों ने सभी आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी तालिबान ने अपने जिम्मे ली थी।
आतंकियों को मारे जाने के करीब चार घंटे बाद बच्चों के शवों को कपड़ों में लपेटकर कब्रिस्तान ले जाया गया। इस्लाम के नियमों के हिसाब से शवों को जल्द से जल्द दफना दिया जाता है इसलिए अंतिम संस्कार की ज्यादातर रस्मों को मंगलवार और बुधवार को ही पूरा करने की कोशिश की गई। ये पाकिस्तान में हुआ सबसे भयानक हमला था, लेकिन इस तरह का हमला पेशावर में पहली बार हुआ था। यह क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा से काफी नजदीक है और यहां पर सेना का काफी दबदबा है।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि जब मुहम्मद ने हमलों में मारे गए शवों को दफनाया हो। साल 2009 में मीना-बाजार में हुए बम धमाकों में जिसमें 105 लोग मारे गए और साल 2009 में ही खैबर बाजार में हुए हमले जिसमें करीब 50 लोग मारे गए थे के शवों को भी उसने दफनाया था।
मुहम्मद ने बताया कि वो कब्र खोदने के लिए आमतौर पर 2,000 से 5,000 पाकिस्तानी रुपए वसूल करता है और उसे इस पैसे की जरूरत थी क्योंकि पिछले पांच से सात महीनों से उसकी आमदनी काफी कम हो गई थी और वो बमुश्किल से ही कुछ शवों को दफना पा रहा था।
लेकिन इन छोटे छोटे बच्चों को दफनाने के लिए मुहम्मद ने एक भी रूपए की फीस नहीं ली। मुहम्मद ने बताया कि यह उसके लिए खुद के बच्चों को दफनाने जैसा था फिर वो अपने ही बच्चों को दफनाने की फीस कैसे ले सकता था।