पाकिस्तान में व्यापक स्तर पर आंदोलन के रूप में उभर रहे पश्तूनों ने पाक सेना पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
इस आंदोलन में पाक सेना पर उनका गुस्सा रैलियों के रूप में निकल रहा है। दरअसल वहां की सेना की कार्रवाई के दौरान पिछले कुछ वर्षों में कई पश्तून लापता हो चुके हैं तो कई पश्तूनों को मारा जा चुका है। पाक सेना वहां रह रहे पश्तूनों का दमन कर रही है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
पश्तूनों का आरोप है कि पाकिस्तान उनके साथ गुलामों जैसा व्यवहार कर रही है। बीते कुछ महीनों में 25 वर्षीय मंजूर पश्तून की पाकिस्तान में काफी लोकप्रियता बढ़ी है। पाकिस्तान में पश्तून की पहचान दबे, पिछ़ड़े समाज के लोगों की आवाज के रूप में है।
मंजूर पीटीएम के नेता हैं। वह तब सुर्खियों में आए जबकि जब दक्षिणी वजीरिस्तान के रहने वाले एक 27 वर्षीय नकीबुल्लाह मेहसुद की कराची में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।