जनरल कमर बाजवा के सुर्खियों से दूर रहने और लोकतंत्र समर्थक के तौर पर अच्छी साख ने पाक पीएम नवाज शरीफ को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। इसी कारण शरीफ ने कई शीर्ष जनरलों को नजरअंदाज कर उन्हें सेना प्रमुख के शक्तिशाली पद पर नियुक्त किया। पाकिस्तान की मीडिया और विशेषज्ञों ने रविवार को इस बात का दावा किया। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री शरीफ ने जनरल राहील शरीफ के उत्तराधिकारी के तौर पर जनरल बाजवा को सेना प्रमुख नियुक्त किया।
पाक के प्रमुख अखबार ‘दी न्यूज’ ने लिखा है, ‘जनरल बाजवा की प्रोफाइल से साफ हो जाता है कि लोकतंत्र में उनके भरोसे ने उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद तक पहुंचाया।’ पाक मीडिया ने कहा है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ऐसे शख्स को सेना प्रमुख नियुक्त करना चाहते थे जो सैन्य विशेषज्ञ होने के साथ ही इस्लामी देश में लोकतंत्र का समर्थन करने वाला हो।
आजादी के बाद करीब 70 साल के पाकिस्तान के इतिहास में आधे से ज्यादा समय तक सेना का शासन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सेना प्रमुख पद के लिए जिन चार जनरलों के नाम की चर्चा थी वे सभी सैन्य अकादमी से एक ही दिन बाहर निकले थे, लेकिन नि:संदेह जनरल बाजवा के पास दूसरों की तुलना में कई प्रकार का अनुभव है। बाजवा की क्षमता, साख, अनुभव और सबसे बड़ी कोर का सफलतापूर्वक नेतृत्व करना भी उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाने में सहायक साबित हुआ।’
एक और प्रमुख अखबार डॉन ने कहा, ‘जनरल बाजवा का नागरिक सरकार के साथ संबंधों को लेकर रवैया ज्यादा उदार है। ऐसा माना जा रहा है कि इसी कारण पीएम शरीफ ने यह निर्णायक फैसला लिया।’ जनरल बाजवा के पूर्व कमांडिंग अधिकारियों ने अखबार को बताया कि नए सेना प्रमुख का मानना है कि सेना को लोकतांत्रिक मसलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।