आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान की सेना ने अपने खर्चों में कटौती की घोषणा की है। पाकिस्तानी सेना को अगले वित्तीय वर्ष के लिए अपने रक्षा बजट में कटौती पर मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना के इस फैसले का स्वागत किया है।
स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में पाकिस्तान का कुल सैन्य खर्च 11.4 अरब डॉलर रहा था। ये खर्च पाकिस्तान की कुल जीडीपी के चार फीसदी के बराबर है। 2018 में भारत का सैन्य खर्च करीब 66.5 अरब डॉलर रहा था। इस मामले में 649 अरब डॉलर के साथ अमेरिका पहले पायदान पर है।
कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से छह अरब डॉलर का बेल आउट पैकेज हासिल करने में सफल रहा था। 1980 के बाद पाकिस्तान के लिए आईएमएफ का ये 13वां बेलआउट पैकेज है। यह कर्ज पाकिस्तान को तीन सालों के दौरान मिलेगा। हालांकि इस समझौते पर अभी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मुहर नहीं लगी है।
पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच बेलआउट पर अक्टूबर 2018 से ही बात चल रही थी। आईएमएफ की वेबसाइट के मुताबिक, पाकिस्तान पर पहले के बेलआउट से ही 5.8 अरब डॉलर का कर्ज है।
2018 की ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर 91.8 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। छह साल पहले जब नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब से इसमें 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पाकिस्तान पर कर्ज और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फीसदी तक पहुंच गया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि चीन का दो तिहाई कर्ज सात फीसदी के उच्च ब्याज दर पर हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे जटिल समस्या यह है कि कोई विदेशी निवेश नहीं आ रहा है। पाकिस्तान में वित्तीय वर्ष 2018 में महज 2.67 अरब डॉलर का निवेश आया था, जबकि चालू खाता घाटा 18 अरब डॉलर का रहा।
आईएमएफ ने कहा है कि अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई दर 14 फीसदी तक पहुंच सकती है। आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद इमरान खान की सरकार के लिए लोकलुभावन वादों से पीछे हटना होगा।
समस्या यह है कि लगातार कम होते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण पाकिस्तान को पास कोई विकल्प नहीं था। चुनावी अभियान के दौरान इमरान खान कहते थे कि वो खुदकुशी करना पसंद करेंगे, लेकिन दुनिया के किसी भी देश से पैसे मांगने नहीं जाएंगे।
लेकिन इमरान खान जब पहले विदेशी दौरे पर सऊदी पहुंचे तो उन्होंने आर्थिक मदद ही मांगी। पिछले महीने ही सरकार ने कहा था कि पिछले पांच सालों में पाकिस्तान पर कर्ज 60 अरब डॉलर से बढ़कर 95 अरब डॉलर हो गया है। पाकिस्तान पर कर्ज और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फीसदी तक पहुंच गया है।
द सेंटर फोर ग्लोबल डिवेलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार चीनी कर्ज का सबसे ज्यादा खतरा पाकिस्तान पर है। चीन का पाकिस्तान में वर्तमान परियोजना 62 अरब डॉलर का है और चीन का इसमें 80 फीसदी हिस्सा है।