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पाकिस्तान : मिनरल वाटर कंपनियों से वसूला जाएगा ‘पानी’ शुल्क

Sun, 13 Jan 2019 02:30 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए मिनरल वॉटर या पेय पदार्थ बेचने वाली कंपनियों को सतही जल (नदियों, तालाबों या झीलों) का इस्तेमाल करने पर 1 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भुगतान करने आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए बिना किसी शुल्क के भूमिगत स्रोतों से निकाला गया पानी कंपनियों द्वारा बेचने के साथ ही मानव उपभोग के लिए उसकी गुणवत्ता को लेकर फैसला सुनाया। 

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चीफ जस्टिस साकिब निसार ने अपने फैसले में कहा कि कंपनियों से इकट्ठा किए गए राजस्व का प्रयोग दियामेर-भाषा और मोहमंद बांध बनाने के लिए किया जाएगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी प्रांतों की सरकारों को कंपनियों से लिए जाने वाले शुल्क के लिए अलग से खाता बनाने के निर्देश दिया। तब तक राशि को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले से बनाए गए बांध कोष में जमा कराया जाएगा।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनियों से मिलने वाले शुल्क का इस्तेमाल बांध निर्माण और पानी संबंधित गतिविधियों के अलावा किसी अन्य कार्य में नहीं किया जाएगा। बांध का निर्माण होने के बाद प्रांतीय सरकारें फंड का इस्तेमाल अपनी जरूरतों के हिसाब से कर सकती हैं। 

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अन्य कंपनियों से भी शुल्क वसूलने की तैयारी 

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष समिति भी गठित की है, जो सतह या भूजल की खपत करने वाले सभी प्रमुख उद्योगों से जल शुल्क की वसूली की गणना, संग्रह और निगरानी के लिए तंत्र तैयार करेगी। इसमें ऊर्जा क्षेत्र, चीनी, इथेनॉल, रिफाइनरी, टेक्सटाइल, गारमेंट, टेनरी, पेट्रोलियम रिफाइनरी जैसी कंपनियां शामिल हैं। सीमेंट उद्योग से पहले ही इसी तरह का शुल्क लिया जा रहा है। 
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