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पाकिस्तान में पहचान को मोहताज हैं कई मंदिर, कौन लेगा इनकी सुध

Fri, 04 Jan 2019 03:45 PM IST
Shani Mishra वर्ल्ड डेस्क, कराची
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पंज तीर्थ (फाइल फोटो)
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प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान ने जनता को नए पाकिस्तान का सपना दिखाया था। इमरान ने वहां की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी को भी यह यकीन दिलाया था कि पकिस्तान उनका अपना देश है। इसी कड़ी में अब पश्चिमी पकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने हिंदू समाज के आस्था के प्रतीक पेशावर के पंज तीर्थ को राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया है।

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पुरातत्व विभाग ने स्थानीय सरकार को इस स्थल से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। नए आदेश के मुताबिक विरासत को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति को 20 लाख का जुर्माना और पांच साल की जेल होगी।

महाभारत से है पंज तीर्थ का संबंध

बताया जा है कि पंज तीर्थ का संबंध पांडु से है। पंज तीर्थ में एक पीपल और खजूर का पेड़ हैं। यहां मौजूद पांच तालाब हिंदुओं के आस्था का प्रतीक है। कार्तिक महीने में यहां के मंदिर और तालाब पर श्रद्धालुओं का जमघट लगता है। दो दिनों तक श्रद्धालु पेड़ के नीचे पूजा अर्चना करते हैं।

सालों तक बेरुखी झेलने के बाद यह स्थल चाचा युनूस पार्क और खैबर पख्तून चैंबर ऑफ कॉमर्स के अधीन आ गया था। जिसको लेकर स्थानीय हिंदुओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

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भारत की आजादी के बाद बड़ी संख्या में हिंदू और सिख नागरिकों ने पकिस्तान से भारत पलायन किया। भारत से भी मुस्लिमों ने पकिस्तान का रूख किया। आजादी के बाद पकिस्तान में 428 हिंदू मंदिर थे जिनमें से 26 से भी कम मंदिर आज मौजूद है। सालों का इतिहास खुद में समेटे यह धार्मिक स्थल आज बदहाली का शिकार होकर मिटने के कगार पर पहुंच गए हैं।

पंज तीर्थ के अलावा ऐसे कई स्थल है जो मुस्लिम आबादी वाले देश पाकिस्तान में हिंदुओं की आस्था के प्रतीक है। इन धार्मिक स्थलों को भी संरक्षित किए जाने की जरुरत है।

कस्तराज मंदिर

Kastaraj temple
कस्तराज मंदिर पंजाब के चकवाल जिले के कतस गांव में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव भाइयों ने कुछ समय यहां बिताया था। मुख्य मंदिर के आसपास कई छोटे मंदिर मौजूद हैं। यह मंदिर 900 साल से भी ज्यादा पुराने बताए जाते हैं। इन्हें छठीं शताब्दी के अंत का माना जाता है। जानकारों मुताबिक यहां मौजूद तालाब में चमत्कारी शक्तियां हैं और यहीं पर यक्ष और युधिष्ठिर संवाद हुआ था।

Kastaraj Temple pond
एक कथा के मुताबिक सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव वर्षों तक रोते रहें। उनके आंसुओं से दो तालाब बने एक भारत के पुष्कर में और दूसरा कतस में। संस्कृत में केताक्ष का मतलब आंसू वाले नेत्र होता है, कालांतर में यही केताक्ष ही कतस हो गया। कस्तराज मंदिर सतगृह, हिंदू मंदिरों के एक समूह का हिस्सा है। मंदिर में दो झरोखे हैं और इसकी छत चूना पत्थर से बनी है। 

हिंगलाज मंदिर

हिंगलाज मंदिर
हिंगलाज मंदिर बलूचिस्तान में है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव सती के शरीर के साथ तांडव कर रहे थे तब विष्णु ने उन्हें शांत करने के लिए सती के शरीर के 52 टुकड़े किये थे। सती का सिर यहां गिरा था। इसे नानी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए यहां तपस्या की थी। हर साल यहां एक बड़ा मेला लगता है जिसमें मुस्लिम नागरिक भी हिस्सा लेते हैं। यहां मुस्लिम भी हिंदुओं की तरह पूरी आस्था से देवी की आराधना करते हैं।

थरपारकर का जैन का मंदिर

jain temple
थरपारकर का यह जैन का मंदिर पाकिस्तान के पुरातात्विक महत्त्व वाले स्थलों में से एक है। 
 

शारदा पीठ

sharada peeth
इस शक्तिपीठ का संबंध भी सती से है। शारदा पीठ 18 महा शक्तियों में से एक गई। कहा जाता है कि यहां देवी सती का दायां हाथ गिरा था। यहां बुद्धि और ज्ञान की देवी शारदा यानी सरस्वती की पूजा होती है। यहां के शारदी गांव में भाद्रपद शुक्लपक्ष के आठवें दिन श्रद्धालु जुटते हैं, इसमें भारत के भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह स्थान टिक्कर नाम की जगह से 40 किमी दूर है। टिक्कर कश्मीर के कुपवाड़ा से डेढ़ किमी दूर है, भारतीय इसी रास्ते का इस्तेमाल कर यहां जाते हैं। 
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गोरखनाथ मंदिर

Guru gorakhnath temple
यह मंदिर गुरु गोरखनाथ के अनुयायियों द्वारा बनाया गया है। कहा जाता है कि मंदिर की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने त्रेता टैग में की थी। यह पेशावर के गोरगथरी के पास बसा है। 60 सालों के संघर्ष के बाद इसे 2011 में दोबारा खोला गया।
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