पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कुछ दिन पहले कहा था कि पुलवामा हमले में जैश की भूमिका के आरोप निराधार हैं। कुरैशी ने कहा था कि पाक सरकार ने जैश नेतृत्व से बात की थी जिसमें जैश ने अपनी हमले में अपनी भूमिका होने से इंकार किया था। एक अन्य इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा था कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान जैश नेतृत्व के संपर्क में हैं।
कुरैशी ने यह भी कहा था कि जैश का मुखिया मसूद अजहर बहुत बीमार है। वह इतना बीमार है कि अपने घर से निकलने की हालत में भी नहीं है। कुरैशी के इन बयानों से स्पष्ट होता है कि पाक सरकार देश में जैश-ए-मोहम्मद का होना स्वीकार करती है।
वहीं, जैश-ए-मोहम्मद को लेकर पाकिस्तान सेना कुछ और ही कहानी बताती है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को पाकिस्तान में जैश की मौजूदगी होने से ही इंकार कर दिया। गफूर ने कहा, 'जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान में वजूद ही नहीं है।' पाक सेना यह स्वीकार करने को ही तैयार नहीं है कि जैश पाक में पल रहा है।
अब ऐसे में संतुलन की समस्या से जूझ रहे पाकिस्तान में सेना और सरकार इतने बड़े विषय पर ही एकमत नहीं हैं। हालांकि इस सबसे एक बात तो स्पष्ट है कि पाक सरकार या पाक सेना, दोनों में से कोई एक झूठ बोल रहा है। अब झूठ कौन बोल रहा है यह तो सब जानते हैं, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या यह है कि ऐसे मुद्दे पर सरकार और सेना का अलग-अलग होना पाकिस्तान के शांति के दावों की सच्चाई जरूर बयान करता है।